वेस्ट यूपी में सांसद बाबू मुनकाद के आने से बसपा में नई टीम खड़ी हो रही है। इस टीम के लिए यह बड़ा सवाल है कि कैसे मूर्छित हो चुकी बसपा की हालत फिर से दुरस्त की जाए। सबसे बड़ी चुनौती तो पार्टी में हो रहे अंतर्विरोध को दूर करना होगा। बहरहाल, पार्र्टी ने पूरा फोकस जल्द होने जा रहे निगम चुनाव पर लगाया है ताकि इसके माध्यम से खोई प्रतिष्ठा को वापस लाया जा सके।
इस विधानसभा चुनाव में बसपा की हालत बद से बदतर हो गई। मेरठ में पिछले दो चुनाव से बसपा खाता भी नहीं खोल पाई है। इस साल भी सारी उम्मीदें धूमिल हो गई। रही सही कसर चुनाव बाद पूरी हो गई जब पार्टी आला पदाधिकारियों का विरोध शुरू हो गया। वेस्ट यूपी प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कई जगह तगड़ा विरोध हुआ और पुतले फूंके गए।
नतीजा, पार्टी थिंक टैंक को यह साफ दिखा कि कमान किसी दूसरे के हाथ में देनी होगी। ऐसे में फिर से बाबू मुनकाद अली को वेस्ट यूपी में लगाया गया है। खास तौर से मेरठ में काम करने को कहा और असर दिखा कि उन्हाेंने आते ही जिला कार्यकारिणी तथा विधानसभा कमेटियां बदल डाली। महानगर कार्यकारिणी का भी गठन कर दिया। माना जा रहा है कि वेस्ट यूपी में अब इस बदलाव का असर दिखेगा। पहले रूठों को मनाया जाएगा। नई टीम खड़ी होने ही लगी है। सबसे बड़ा टारगेट है नगर निगम चुनाव। इस चुनाव में इस बार बसपा सिंबल पर मैदान में उतरेगी। पार्टी ने पूरी ताकत इसी पर लगाई है ताकि इस चुनाव में अपनी ताकत का अहसास कराया जा सके। उधर बागियों को फिर से पार्टी में शामिल किया जा सकता है।
पैसे से तौबा
पार्टी पैसे से भी तौबा कर रही है। हर बैठक में कहा जा रहा है निगम चुनाव में किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। मेरठ आए बाबू मुनकाद ने भी बैठक में स्पष्ट किया कि इस चुनाव में किसी उम्मीदवार की कोई पर्ची रकम की नहीं काटी जाएगी। दरअसल, इस ओर भी पार्टी का नकारात्मक मैसेज जा रहा था और इसे भी सुधारने की पूरी कोशिश है।