संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। वन विभाग ने जंगली सूकर के अवैध शिकार के मामले में बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों पर छह लाख रुपये का जुर्माना (प्रशमन शुल्क) लगाकर सरकारी कोष में जमा कराया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार और तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि बृहस्पतिवार को उन्हें सूचना मिली थी जिसके के आधार पर वन विभाग की टीम ने मध्य गंगा नहर के समीप वन आरक्षित जंगल में स्थित एक निजी खेत और ट्यूबवेल पर छापे की कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान हरदेव उर्फ डिब्बू और गुरबख्श रठौरा खुर्द तथा बलबीर निवासी रामराज को जंगली सूकर के अवैध शिकार की तैयारी करते हुए गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से छह शिकार जाल, करंट प्रवाहित करने वाले तार, एक देसी कट्टा, एक छुरा, तंदूरी भट्टी और कच्ची शराब बरामद की गई।
वन विभाग के अनुसार, बरामद सामान से स्पष्ट है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से वन्य जीवों का शिकार कर रहे थे। तीनों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई। इसके बाद सभी आरोपियों से कुल छह लाख रुपये का प्रशमन शुल्क वसूल कर सरकारी कोष में जमा कराया गया।
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने कहा कि हस्तिनापुर वन क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी अथवा उन्हें नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। जाल, करंट या अन्य अवैध साधनों से शिकार करना गंभीर अपराध है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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