10 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म केस में सीसीएसयू के छात्र नेता विनीत चपराना और उसके साथी विवेक तोमर को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है। पीड़िता और गवाहों के बयानों में विरोधाभास मिलने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभय प्रताप सिंह-द्वितीय की अदालत ने दोनों को बरी किया है।
मेडिकल थाना क्षेत्र में एक युवती ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। युवती का कहना था कि 12 अक्तूबर 2016 की सुबह जबरन कार में खींचकर उससे सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने गैंगरेप और जान से मारने की धमकी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
विवेचना के बाद पुलिस ने विनीत और विवेक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। मेडिकल परीक्षण में दुष्कर्म, संघर्ष या चोट का निशान नहीं मिला था। बृहस्पतिवार को अदालत ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयान और वकीलों की बहस सुनने के बाद संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। छात्र नेता विनीत चपराना का कहना है कि गैंगस्टर अमित मिरिंडा ने साजिश रचकर उन्हें झूठे केस में फंसवाया था। उन्हें 10 साल बाद न्याय मिला है।