हिमाचल पुलिस को शक है कि पकडे़ गए युवकों के तार सीमा पार से नकली नोटों की तस्करी करने वालों से जुडे़ हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग काफी समय से वहीं पर रह रहे थे। फेरी के नाम पर इसी तरह लोगों से ठगी कर नकली नोटों को ठिकाने लगाते थे। लिहाजा पुलिस इनसे लंबी पूछताछ के बाद ये राज उगलवाने की कोशिश करेगी।
पहले भी पकडे़ जा चुके हैं जाली नोट
वेस्ट यूपी में नकली नोटों का कारोबार वर्षों पुराना है। पूर्व में भी यहां बड़ी मात्रा में नकली नोटों की खेप पकड़ी जा चुकी है। मेरठ शहर में ही सन 2014 में ब्रह्मपुरी थानाक्षेत्र में थानाध्यक्ष प्रशांत कपिल ने 24 लाख 60 हजार के नकली नोटों की खेप पकड़ी थी। इस मामले में वेस्ट बंगाल का एक युवक पकड़ा गया था। उसके पास से एक हजार और 500 के जाली नोट बरामद हुए थे। इसके सात महीने पूर्व 2014 में ही टीपी नगर थानाक्षेत्र में भी 50 हजार के नकली नोट पकड़े गए थे। वहीं शामली जिले का कैराना कस्बा तो गठरी व्यवसाय की आड़ में हथियार, ड्रग्स और नकली नोटों की तस्करी के लिए पहले से ही चर्चित रहा है। कैराना में हाल ही में तीन लाख की नई नकली करेंसी पुलिस ने पकड़ी थी। आरोपी मुजफ्फरनगर के थे। इनके पास से एक प्रिंटर भी मिला था। जिस पर ये लोग नोट छापते थे। अब सरधना के युवकों का कांगड़ा में पकड़ा जाना बता रहा है कि कि वेस्ट यूपी में नकली नोटों का कारोबार चल रहा है।
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