समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं होने के कारण मजदूर भूखमरी के कगार पर
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। केंद्र सरकार देश के गरीब मजदूरों का आर्थिक स्तर सुधारने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चला रही है। गरीबों के कल्याण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सरकार के बड़े-बड़े दावे इसके विपरीत है। जनपद में मनरेगा मजदूरों को समय से मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है। इस कारण जनपद में हजारों मनरेगा मजदूरों को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। मजदूरों के लगातार शिकायत करने के बाद भी ब्लाक या जिला स्तर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि नियमानुसार मनरेगा के तहत काम करने के 15 दिन में मजदूरों के खाते मेें पैसा आ जाना चाहिए।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनपद में मनरेगा के तहत काम करने वाले लगभग 32212 मजदूर पंजीकृत हैं। पंजीकृत मजदूरों से समय-समय पर शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के अंतर्गत पेड़ पौधों में पानी देना, पेड़ों की देखरेख करना, सिंचाई नाली व नालों की सफाई-खुदाई का कार्य करना व चकरोड मरम्मत का काम कराया जाता है। इसके बदले मजदूरों को मजदूरी के नाम पर 200 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, लेकिन फिलहाल मनरेगा मजदूरों का मनरेगा के तहत काम करने से मोह भंग हो रहा है। इसका मुख्य कारण समय पर मजदूरी नहीं मिलना है। विभाग सूत्रों के अनुसार चार फरवरी 2020 से जनपद के लगभग 8464 मजदूरों को मजदूरी के नाम पर एक पैसा नहीं मिला है। इससे मजदूर परेशान हैं। इस संबंध में बीडीओ राहुल वर्मा ने बताया कि फिलहाल ऊपर से पैसा नहीं आया, जैसे ही पैसा मिलता है, तत्काल प्रभाव से मजदूरों के खाते में डाल दिया जाएगा।
योजना की धनराशि अभी तक नहीं मिली
फिलहाल शासन से मनरेगा योजना की धनराशि अभी तक नहीं मिली है, जैसे ही धनराशि मिलती है, सीधे मनरेगा मजदूरों के खातों में मजदूरी की धनराशि डाल दी जाएगी। - अभिराम त्रिवेदी, सीडीओ
ब्लाक का नाम मजदूरों की संख्या
बड़ौत 1666
बिनौली 1105
छपरौली 1076
पिलाना 1624
बागपत 2227
खेकड़ा 766