इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संस्था में दी जानी वाली तालीम, छात्रों के रहन सहन की व्यवस्था के साथ ही संस्था और देवबंदी उलमा के इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। दल के सदस्यों ने संस्था के भीतर रखे हुजूर पाक के रुमाल मुबारक का दीदार भी किया। यहां से वह लाइब्रेरी में पहुंचे जहां उन्होंने ऐतिहासिक पुस्तकों के जखीरे को देखा।
इसके उपरांत वह एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया और निर्माणाधीन लाइब्रेरी को देखने पहुंचे। दल की अगुवाई कर रहे मौलाना अब्दुल बासित ने कहा कि उन्हें यहां आकर रुहानी सुकून महसूस मिला है। दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा था यह उससे कहीं अधिक है।
प्रतिनिधिमंडल में मौलाना अब्दुल करीम, मौलाना अब्दुल रऊफ, हाफिज फैसल, मौलाना सालेह, मौलाना यासिर, मौलाना कमरुद्दीन, हाफिज अब्दुल हक, मौलाना अरसलान, मौलाना अब्दुल अलीम, मौलाना नेमातुल्लाह, मौलाना अब्दुल शकूर और मौलाना सलाहुद्दीन आदि शामिल रहे।
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