65 प्रतिशत पुरुष, 35 फीसदी निकलीं महिलाएं
घर-घर जाकर जांच करने का यह सर्वे 47451 घरों में 474475 लोगों पर कराया गया, जिनमें से संदेह होने पर 2196 लोगों के बलगम के सैंपल लिए गए, जिनकी लैंब में जांच कराई गई। इनमें से 258 के सैंपल की रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि हुई है। इनमें 25 से 50 साल उम्र के मरीज सबसे ज्यादा हैं।
इनमें करीब 65 प्रतिशत पुरुष और 35 फीसदी महिलाएं हैं। यह अभियान लल्लापुरा, मलियाना, साबुन गोदाम, मकबरा डिग्गी, भावनपुर, पुलिस लाइंस, संजयनगर, रजपुरा, रोहटा, घिसौली, करनावल, लावड़, सरधना, सलावा और कंकरखेड़ा क्षेत्र में चलाया गया।
पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीज
जिले में पिछले पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीजों को टीबी की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़े उन लोगों के हैं, जिनका स्वास्थ्य विभाग ने इलाज किया है। इस अभियान का नाम ‘टीबी-फ्री इंडिया’ है। प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोगियों से मुक्त करने के प्रयास के तहत सक्रिय क्षय रोगी अभियान चलाया गया।
बीच में इलाज छोड़ना है खतरनाक
घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एक मरीज साल भर अगर इलाज न कराए तो वह 10-12 लोगों को यह बीमारी दे सकता है। नियमित जांच कराने के बाद नियमित दवाएं खाने से बीमारी ठीक हो जाती है। चिंता इस बात की है कि कई मरीज बीच में इलाज छोड़ देते हैं, जो कि गलत तरीका है। इससे बीमारी बढ़ सकती है।
- डॉ. एमएस फौजदार, जिला क्षय रोग अधिकारी
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