- चौधरी चरण सिंह विवि ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए शुरू की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर संजय कुमार ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.ccsuniversity.ac in पर न्यूज एंड नोटिफिकेशन (इवेंट) सेक्शन में ऑनलाइन सर्वे लिंक साझा किया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय एवं मेरठ क्षेत्र के युवाओं और नागरिकों के बीच आत्महत्या और तनाव के प्रति व्यावहारों का अध्ययन करना है।
इस सर्वे के माध्यम से कोई भी व्यक्ति स्वयं, अपने बच्चे, किसी मित्र या परिजन के लिए यह जान सकता है कि उनका मानसिक रुझान डिप्रेशन या आत्महत्या की ओर कितना है। सर्वे पूरी तरह गोपनीय है और यह किसी भी प्रकार की मानसिक बीमारी का औपचारिक निदान (डायग्नोसिस) नहीं करता, बल्कि यह केवल एक संकेत देता है कि संबंधित व्यक्ति की मानसिक स्थिति कैसी है और क्या उसमें किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
मेरठ क्षेत्र में बढ़ रही चिंता
प्रो. संजय कुमार के अनुसार, हाल के वर्षों में मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मानसिक तनाव, अकेलापन, और आत्महत्या की प्रवृत्तियों में बढ़ोतरी देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश में आत्महत्या के मामलों में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें से एक बड़ा हिस्सा युवाओं और विद्यार्थियों का रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, प्रतिस्पर्धात्मक जीवनशैली और पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या के प्रमुख कारण बन रहे हैं। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे सर्वे और जागरूकता अभियान समय की आवश्यकता है।
सर्वे का उद्देश्य
प्रो. संजय कुमार के अनुसार इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि लोगों के मन में आत्महत्या या तनाव को लेकर क्या सोच है, और किस प्रकार के व्यवहार इनसे जुड़े हैं। इससे हम मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं की गहराई को समझ सकेंगे और भविष्य में नीतिगत और सामाजिक स्तर पर प्रभावी कदम उठा सकेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सर्वे केवल अनुसंधान के लिए है और किसी भी प्रकार की मानसिक चिकित्सा का विकल्प नहीं है। यदि किसी को अत्यधिक तनाव वाले या आत्मघाती विचार आ रहे हैं तो तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
क्यों जरूरी है समय रहते पहचान?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, हर 40 सेकंड में दुनिया में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। भारत में हर साल करीब 1.5 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। डिप्रेशन और आत्महत्या के विचार कई बार धीरे-धीरे बढ़ते हैं और यदि समय रहते इनका पता लग जाए, तो इन्हें रोका जा सकता है।
अगला कदम क्या?
सर्वे के परिणामों के आधार पर प्रो. संजय कुमार और उनकी टीम एक रिपोर्ट तैयार करेंगे, जो यह दर्शाएगी कि मेरठ क्षेत्र में आत्महत्या और डिप्रेशन के प्रति लोगों के व्यवहार कैसे हैं। यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संस्थानों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है। यह सर्वे मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया मेरठ के सहयोग से किया जा रहा है। यदि आप या आपका कोई परिचित डिप्रेशन या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो कृपया हेल्पलाइन या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है।