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सरकारी जमीन का लेखाजोखा नहीं, समिति को जवाब नहीं दे पाए अफसर

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मेरठ। आवास विकास की जमीन कहां है, इसका लेखाजोखा नहीं है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में बैंक लोन न मिलना, सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण सहित कई समस्या के सवाल का शुक्रवार को प्राक्कलन समिति को सरकारी अफसर जवाब नहीं दे पाए। स्टांप घोटाले की जांच अफसरों ने अधर में लटका रखी है। अब सरकार की योजना और लंबित कार्याें को पूरा करने के लिए समिति ने पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित कर दी गई है।
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विकास भवन सभागार में विधानसभा की प्राक्कलन समिति सभापति कैंट विधायक अमित अग्रवाल की अध्यक्षता में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, राज्य कर विभाग, परिवहन विभाग, यूपीडा, गंगा एक्सप्रेसवे प्राधिकरण सहित 17 विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। अमित अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना युवा पीढ़ी के लिए शुरू की, इसमें कोई भी बैंक लोन देने में देरी न करें। जनपदस्तर पर गठित समिति युवा उद्यमी योजना की बैंकवार नियमित समीक्षा करें।
नगर पालिका में स्वच्छता, कूड़ा प्रबंधन की नियमित निगरानी कर कार्यवाही करें। नगर निगम, नगर पालिका स्वच्छता अभियान और कूड़ा प्रबंधन हेतु प्रशिक्षण कराया जाए। आरएम रोडवेज को निर्देश दिया कि शहर में सिटी बस आपूर्ति हेतु जो प्रपोजल भेजे गए समिति को उपलब्ध कराएं, जिससे कि शासन में पैरवी की जा सके।
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दिल्ली रोड पर रैपिड रेल प्रोजेक्ट को लेकर आरआरटीएस के अधिकारियों को निर्देश दिए कि रैपिड रेल, सड़क मार्ग को पूर्णतः ठीक करना सुनिश्चित करें। इस संबंध में सीडीओ को निर्देश दिए कि कमेटी गठित कर पूरे सड़क मार्ग का निरीक्षण करें, सड़क मार्ग को ठीक कराएं। अवैध रूप से संचालित वाहनों पर कार्रवाई करें। विभाग रेवेन्यू कलेक्शन को ओर बेहतर करें, कर, स्टाम्प चोरी के विरुद्ध कार्यवाही करें। प्राक्कलन समिति सदस्य एवं सपा विधायक शाहिद मंजूर ने कहा कि आवास विकास की जमीन कितनी है और फिलहाल क्या स्थिति है। हाउसिंग सोसाइटी की वर्तमान स्थिति बताएं। जिस पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। शाहिद मंजूर का कहना कि सरकारी जमीन का लेखाजोखा अधिकारियों के पास नहीं हैं। आवास विकास सहित सरकारी विभागों की जमीन कहां-कहां हैं, अधिकारियों को पता नहीं है। विकास प्राधिकरण ने अपनी जमीन तलाशी और 700-800 करोड़ की बिक्री की।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से 92 करोड़ वापस
प्राक्कलन समिति के सभापति ने बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जमकर क्लास लगाई। सीएमओ से जवाब मांगा कि शासन द्वारा जारी धनराशि भी खर्च क्यों नहीं की है। वर्ष 2024 में शासन से 167 करोड़ रुपये आए थे, जिसमें से 92 करोड़ वापस चले गए। खर्च न होने के चलते धनराशि वापस जा रही हैं, जबकि जनपद में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई कार्य अधूरे हैं। बैंक लोन पर नाराजगी जताई। 2332 आवेदन में से मात्र 625 को ही लोन दिया गया। इसके लिए सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटी बना दी गई।

यह बैठक में मौजूद
सदस्य रवेन्द्र पाल सिंह, सदस्य डॉ. मंजू सिवाच, एसएसपी विपिन ताडा, सीडीओ नूपुर गोयल, एडीएम प्रशासन बलराम सिंह, एडीएम भूमि अध्यापति राजपाल सिंह, सीएमओ डाॅ. अशोक कटारिया, एसपी टै्रफिक राघवेन्द्र मिश्रा, पीडीडीआरडीए सुनील कुमार सिंह, जिला सूचना अधिकारी सुमित कुमार, एलडीएम एसके मजूमदार, उपायुक्त उद्योग दीपेन्द्र कुमार, बैंकर्स, ईओ सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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