मेरठ में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन के साथ-साथ रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता में भी खेल हो रहा है। इंजेक्शन अब पांच से पंद्रह गुना कीमत पर कालाबाजारी से मिल रहा है। प्रशासन ड्रग्स विभाग के साथ मिलकर यह इंजेक्शन कोविड अस्पतालों को उपलब्ध तो करा रहा है लेकिन अस्पताल में यह किन मरीजों को लगा? क्या कीमत ली गई? इसकी निगरानी की व्यवस्था नहीं है। दूसरी ओर मेरठ में कोविड अस्पताल हर रोज 1500 से 2000 इंजेक्शन तक की मांग कर रहे हैं, जबकि उपलब्धता बेहद कम है।
बताया गया कि गुरुवार को 125 इंजेक्शन मिले, जबकि मंगलवार को 128 इंजेक्शन मिले थे। विशेषज्ञ चिकित्सक रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी न करने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह लाभ करता है लेकिन जान नहीं बचा सकता। बावजूद इंजेक्शन को लेने के लिए परेशान हैं। अस्पताल वाले कह रहे हैं कि उनके यहां उपलब्ध नहीं है। लोग एक-एक इंजेक्शन के लिए परेशान हैं। एक मरीज के लिए इसकी छह डोज की जरूरत पड़ती है।
अभी प्रशासन कर रहा फैसला
ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए अलग-अलग मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इंजेक्शन उपलब्ध होने के बाद इसकी सूची जिलाधिकारी और एडीएम सिटी को भेजी जाती है। वह तय करते हैं कि किस अस्पताल को कितने-कितने इंजेक्शन भेजे जाने हैं। फिर उन अस्पतालों को उतने इंजेक्शन भेज दिए जाते हैं। अस्पताल इंजेक्शन का किस तरह इस्तेमाल कर रहा है, यह अस्पताल प्रबंधन का काम है।
व्यवस्था के लिए कमेटी बनाएं
ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल का कहना है कि अगर रेमडेसिविर को लेकर व्यवस्था बनानी है तो इसके लिए प्रशासन को कमेटी बनाना चाहिए, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चिकित्सक भी हों। कमेटी जांच करें कि जिन अस्पतालों को उन्होंने इंजेक्शन उपलब्ध कराए थे, वह किन मरीजों को लगाया गया और कितने पैसे लिए गए। अगर इसकी रोजाना निगरानी होगी तो व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
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बनाई जा रही निगरानी कमेटी
रेमडेसिविर की कमी है लेकिन इतनी भी नहीं कि हाहाकार मच जाए। मेरठ को आज ही 125 इंजेक्शन मिले हैं। इसके लिए निगरानी कमेटी गठित की जा रही है, जो प्राइवेट अस्पतालों पर निगरानी रखेगी। ऑक्सीजन को लेकर यही स्थिति पैदा होने पर प्रशासन ने व्यवस्था अपने हाथ में ली थी। अब इस समस्या का समाधान लगभग हो चुका है।
- सुरेंद्र सिंह, कमिश्नर
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