15 फीसद तक महंगा हुआ कच्चा माल
कोरोना सीजन के बाद से ही पेपर मिलों के लिए कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया है। मेरठ की पेपर मिलें स्क्रैप पेपर से फ्रेश पेपर तैयार करती हैं। नया पेपर बनाने में इस्तेमाल होने वाले पुराने पेपर को मिलें यूरोप से आयात करती हैं। क्योंकि वहां के स्क्रैप की गुणवत्ता भारतीय पेपर से अच्छी होती है। कोरोना के कारण भारतीय, विदेशी दोनों ही कच्चे माल की कीमतों में 15 फीसद तक का इजाफा हुआ है। यूरोप से कच्चा माल आने में दिक्कत के कारण भारतीय कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
ये कहना कारोबारियों का
रबर कारोबारी अनिल पुंडीर कहते हैं कि कच्चे माल का संकट आ रहा है, इसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है, कच्चा माल न मिलने से उत्पादन नहीं हो रहा और सप्लाई प्रभावित हो रही है।
पसवाड़ा पेपर मिल के एमडी और एनसीआर पेपर मिल एसोसिएशन के अध्य्क्ष अरविंद अग्रवाल के अनुसार पेपर मिलों के सामने कच्चे माल का भारी संकट आ गया है। स्क्रेप पेपर की कीमत में सीधे 15 फीसद की बढ़त हुई है। उस पर भी माल नहीं मिल रहा।
स्पोर्ट्स उद्यमी शेखर भल्ला कहते हैं कि खेल उपकरण बनाने के लिए धागा, कपड़ा, रबर, धातु सब महंगे हो गए हैं। पहले जो कच्चा माल चीन से आता था अब वो भारत या अन्य देशों से मंगा रहे हैं उसकी कीमत बड़ी है। कन्साइनमेंट न मिलने के कारण माल का आयात नहीं हो रहा। बंदरगाहों पर ही माल फंसा है।
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