इसके अलावा जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 54 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 29 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। 25 चिकित्सकों की कमी है। जबकि मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सकों व शिक्षकों की कमी है। फार्मेसी, मेडिसिन, रेडियोथेरेपी, रेडियोडायग्नोसिस, ह्यूमन मेटाबोल्जिम, ईएनटी और गायनोकोलोजी में पद खाली है। फार्माकोलोजी, फोरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी में भी पद खाली चल रहे हैं।
बजट नहीं आया तो होगा संकट
जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि अभी ज्यादा दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि मरीज कम थे। लेकिन अब मरीज बढ़ने लगे हैं, आगे बजट नहीं आया तो दवाओं की दिक्कत होगी।
लॉकडाउन में नहीं मंगाईं दवाएं
मेडिकल के प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के पास आठ करोड़ से ज्यादा दवाओं का बजट और जरूरी दवाएं हैं। लॉकडाउन में ओपीडी न चलने के कारण ज्यादा दवाएं नहीं मंगाई गईं। जरूरत के हिसाब से मंगाई जाएंगी। कुछ अस्थायी चिकित्सक भी रखे गए हैं।
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