थानों में रखे इन हथियारों की पुलिस मुफ्त में पहरेदारी कर रही है। पुलिस के अनुसार, लाइसेंसी शस्त्र थानों में रखने के लिए कोई किराया नहीं लिया जाता। थानों में शस्त्र जमा कराने का यह भी एक बड़ा कारण है। थानों के हेड मोहर्रिर ने कई बार पुलिस अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया।
हथियार रखवा दो मंत्री जी
अब तो ये हालत हैं कि पुलिस थानों में लाइसेंसी हथियार रखवाने के लिए लोग मंत्रीजी तक की सिफारिश लेकर आ रहे हैं। मालखाने में जगह न होने का हवाला देने पर लोग प्रशासनिक अधिकारी से परमीशन लेकर अपने हथियार दूसरे राज्यों में ले जाते हैं। इसके लिए उनको अलग से फीस देनी पड़ती है। सिविल लाइन, लालकुर्ती और सदर बाजार में ऐसे कई मामले रोजाना आते हैं।
चुनाव में हालत खराब
लोकसभा, विधानसभा, निकाय चुनाव, प्रधानी चुनाव में जिले की पुलिस 23 हजार लाइसेंसी हथियार थाने में जमा कराती हैं। ताकि कोई इसका दुरुपयोग न करे। पुलिस का मानना है कि चुनाव के दौरान ही लाइसेंसी हथियार थाने में जमा होते है। लोग इसका फायदा उठाते हैं।
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