सहारनपुर में फैली जातीय हिंसा अभी तक समाप्त भी नहीं हुई कि एक बार फिर से सहारनपुर सुलगने लगा। ताजा मामला फिर से वायरल पोस्ट का सामने आया है। दलित और ठाकुरों के बीच हुई जातीय हिंसा के बाद दोनों तरफ के लोग सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सूचना मिल रही हैं कि लोगों को इकट्ठा कर पंचायत की जा रही हैं और माहौल बिगाड़ने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। वहीं बृहस्पतिवार को ठाकुरों ने पंचायत बुलाई, तो दलितों ने भी बैठक करने की योजना बनाई। वहां तैनात पुलिसफोर्स ने किसी तरह मामले को शांत किया। दोनों तरफ से लगातार सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डाले जा रहे हैं।
राष्ट्रीय एकीकरण समिति की बैठक में नेताओं से निजी स्वार्थ के लिए माहौल खराब करने से बाज आने और मीडिया के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने आदि के प्रस्ताव पास किए गए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों घटी तमाम घटनाओं के पीछे कुछ लोगों का निजी स्वार्थ दिखाई दे रहा है।
बृहस्पतिवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित राष्ट्रीय एकीकरण समिति की बैठक में वक्ताओं ने पिछले दिनों हुए बवाल में मीडिया कर्मियों पर हुए हमले की निंदा की। युवाओं को संयम दिखाते हुए माहौल का सौहार्दपूर्ण बनाने में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने शोभायात्राओं में हथियार नहीं लेकर चलने का आह्वान किया। अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष तसमीम बानो और संचालन डॉ. वीरेंद्र आजम ने किया। फादर डेनियल मसीह, मौलवी फरीद, डॉ. एसके उपाध्याय, अपर मुख्य अधिकारी सुनील यादव, शीतल टंडन, माजिद अली, अक्षय प्रताप राणा, अनीस सिद्दीकी आदि ने भी विचार रखे।
सोशल मीडिया पर भड़काने वाला पोस्ट
सहारनपुर में दलित और ठाकुरों के बीच हुआ था बवाल
वहीं सहारनपुर में सोशल मीडिया पर भड़काने वाला पोस्ट किए जाने एवं 18 मई को शब्बीरपुर पहुंचने के राजपूत समाज के आह्वान पर पूर्व मंत्री स्व. राजेंद्र राणा के पुत्र कार्तिकेय राणा पर पुलिस ने बड़गांव थाना में आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करा दी। उसके बाद गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। लेकिन पुलिस को चकमा देकर कार्तिकेय अपने गांव भायला पहुंच गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी भायला पहुंचे, लेकिन कार्तिकेय को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं दिखा सके। बाद में कार्तिकेय ने बसपा के पूर्व विधायक रविंद्र मोल्हू की गिरफ्तारी की मांग समेत पांच सूत्रीय मांग पत्र एडीएम को सौंपा।
गौरतलब है कि सहारनपुर के शब्बीरपुर कांड और इसके बाद जिले भर में हुई हिंसा ओर बवाल के मामले में दर्ज एफआईआर की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसएसपी की ओर से गठित यह सेल पूरे मामले की पड़ताल करेगी। बवाल के बाद सोशल मीडिया के खुराफायितों पर भी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। भड़काऊ मैसेज पोस्ट करने वाले दो और आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पुलिस ने मंगलवार को राष्ट्रीय लोकदल के प्रतिनिधिमंडल को शब्बीरपुर में घुसने नहीं दिया। उधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने शब्बीरपुर गांव में पीड़ितों से मुलाकात कर प्रदेश सरकार कोसा और कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में उठाएगी।
दलित-राजपूत संघर्ष के पीछे किसका हाथ है
सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाला गिरफ्तार
एसएसपी एके दूबे ने बताया कि जातीय हिंसा में जितने भी मामले दर्ज हुए हैं उनकी जांच एसआईटी को जांच सौंप दी गई है। इस टीम में तकनीकी जानकारी रखने वाले अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। जांच के साथ-साथ चेहरों की पहचान कराकर कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच की साईबर सेल कर रही है। साइबर सेल ने शुक्रवार को ग्राम मई ताहरपुर के दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। कुल पांच लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
वहीं एसएसपी ने बताया कि दलित-राजपूत संघर्ष के पीछे किसका हाथ है और कौन इसे हवा दे रहा है, इसकी जांच कराई जा रही है। भीम आर्मी के नक्सली कनेक्शन के सवाल पर उनका कहना है कि इसकी जांच कराई जा रही है। सहारनपुर के गांव शब्बीरपुर में 5 मई को महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा का विरोध में किए गए पथराव और आगजनी की घटना और उसके बाद पूरे जिले में 9 मई को हुए बवाल के मामले में अब तक अलग-अलग थाने में 25 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकीं हैं। इनमें छह एफआईआर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामलों की हैं। एसएसपी का कहना है कि इस पूरी कवायद के पीछे हमारी मंशा है कि किसी निर्दोष पर कार्रवाई न हो सके और दोषी बच न पाएं। पुलिस के साथ-साथ यह टीम भी अपना काम करती रहेगी।