मकान में आग लगने के दौरान इकबाल के परिवार की महिलाएं खाना बनाने की तैयारी कर रहीं थीं। बेटे ङॉ. अरशद ने बताया कि वह नमाज पढ़ने जा रहे थे। उस दौरान परिवार की महिलाएं खाना बनाने की तैयारी कर रहीं थी। जब वह लौटकर आए तो उन्हें हादसे की जानकारी हुई। पड़ोसियों ने बताया कि आगजनी के दौरान घर में डॉ. अरशद और फारुख की पत्नी के अलावा उनके बच्चे शहरीश, अरहम और रिहान भी मौजूद थे। जब आग ने विकराल रूप धारण किया और मकान में धुआं भरने लगा तो परिवार के सदस्य जान बचाने के लिए ऊपर की ओर भागे। इस दौरान डॉ. अरशद और फारुख की पत्नी शहरीश, अरहम व रिहान को लेकर छत के रास्ते पड़ोसियों के घर चले गए। लेकिन रुखसाना व अन्य बच्चे कमरे जाकर फंस गए।
जान बचाने के लिए चीखते चिल्लाते रहे रखसाना और बच्चे
जान बचाने के लिए रुखसाना और बच्चे दूसरी मंजिल के कमरे में पहुंच गए। कुछ ही देर में आग दूसरी मंजिल तक पहुंच गई। इस दौरान रुखसाना और बच्चे खिड़की खोलकर जान बचाने के लिए चीखते चिल्लाते रहे। आसपास के लोगोें ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन भीषण आग लगने के कारण कोई भी मकान के अंदर दाखिल नहीं हो सका। जब तक दमकलकर्मी और पुलिस वहां पहुंची तक उनकी जान जा चुकी थी।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि आग ने कुछ ही देर में मकान के तीनों मंजिल को आगोश में ले लिया था। महिला और बच्चों की चीख पुकार सुनकर लोगों ने पानी डालने व उन तक पहुंचने का प्रयास किया। लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली पुलिस जब तक वहां पहुंची। महिला और पांचों बच्चे कमरे में बेसुध पड़े मिले।