पकड़ में नहीं आ रहा नशे का कारोबार करने वाला सफेदपोश
मेरठ। नशे का कारोबार करने वालों पर पुलिस की काफी समय बाद नजर तिरछी हुई है। पुलिस ने नशे के कारोबार की एक बड़ी मछली को ही पकड़ा है, लेकिन मगरमच्छ अभी भी पकड़ से बाहर हैं। क्योंकि एक सफेदपोश नेता इस पूरे कारोबार को संचालित कर रहा है। जिसने अपनी पार्टी की सरकार में इस नशे के कारोबार की जड़ें गहराई तक मजबूत कर ली थी।
शहर में नशे का कारोबार पूरी तरह फलफूल रहा है। भांग के ठेकों की आड़ में चरस, अफीम और गांजा खुलेआम बिकता है। शहर के शिक्षण संस्थान इस नशे के कारोबार के सबसे बड़े ठिकाने हैं। कैंट एरिया के स्कूल, व्यवसायिक शिक्षण संस्थानों के आसपास नशे के सौदागर के दलाल हर जगह चाय आदि के खोखों पर अपना ठिकाना बनाकर रखते हैं, जहां पर यह नशा आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
गंगानगर क्षेत्र में मवाना रोड के तमाम स्कूल-कॉलेज के बच्चों को नशे का शिकार बनाया जा रहा है। कैंट एरिया के वेस्ट एंड रोड के स्कूल और एनएच-58 पर स्थित कॉलेज के आसपास भी नशे का कारोबार पूरी तरह चल रहा है।
नशे के सौदागर का बड़ा प्यादा है राजू चौहान
राजू चौहान मूलरूप से मवाना का रहने वाला है। जिसके संबंध एक पूर्व विधायक से हैं। पूर्व विधायक की सरपरस्ती में राजू चौहान ने नशे का कारोबार शुरू किया। सूत्रों की मानें तो पूर्व विधायक ही नशे के कारोबार का असली डीलर है। राजू को भांग के ठेके दिलाए गए और उसकी आड़ में चरस आदि की बिक्री कराई गई। राजू चौहान का भाई इस ड्रग्स को पूर्वांचल से लाने का काम करता है।
पुलिस और आबकारी का रहा है संरक्षण
राजू चौहान का पिछले साल गंगानगर थाने से मात्र 50 मीटर की दूरी पर भांग का ठेका था। अमर उजाला ने इस भांग के ठेके से चरस की बिक्री का स्टिंग आपरेशन किया था, लेकिन आबकारी विभाग ने ठेका निरस्त नहीं किया और न ही पुलिस ने कार्रवाई की। इसे साफ है कि दोनों ही विभाग नशे के कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं।
अब एक सत्ता दल के नेता का संरक्षण
राजू चौहान नशे के कारोबार को एक पूर्व विधायक के सहयोग से ही अभी तक संचालित कर रहा है। लेकिन सत्ता बदलने के बाद उसने सत्ता पक्ष के एक नेता का दामन भी अप्रत्यक्ष रूप से थाम लिया है। बताया जा रहा है कि शहर के तमाम हुक्का बार आदि में राजू चौहान के जरिये ही नशा सप्लाई होता है।