अच्छरौंडा गांव में दो मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने पर मलबा हटाती जेसीबी।
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परतापुर के अछरौंडा गांव में रविवार शाम दो मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। जिसमें बिल्डिंग के मालिक समेत छह लोग घायल हो गए। जबकि ठेकेदार के बेटे समेत दो लोग मलबे में दब गए। घायलों की चीख पुकार पर सैकड़ों लोग बचाव में जुटे। लेकिन मलबे के आगे ग्रामीण भी बेबस नजर आये। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। देर रात गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए पूरी मशक्कत की जा रही थी।
परतापुर में गगोल रोड से सटे अछरौंडा में फैक्ट्री बनाने के लिए करीब पांच सौ वर्ग मीटर जमीन पर दो मंजिला बिल्डिंग बनाई जा रही थी। पिलर खड़े करके पहली मंजिल का लिंटर दो महीने पहले डाल दिया था। जबकि दूसरी मंजिल पर लिंटर डाला जा रहा था। सीओ ब्रह्मपुरी धर्मेंद्र चौहान ने बताया कि बिल्डिंग के मालिक शास्त्रीनगर निवासी आशीष त्यागी और शताब्दीनगर निवासी निपेंद्र त्यागी हैं। ठेकेदार गुलाब सिंह निवासी शिवपुरम 25 लोगों के साथ दूसरी मंजिल पर लिंटर डलवा रहा था। शाम करीब पांच बजे आधे भाग पर लिंटर डालकर लेबर ने काम बंद कर दिया।
इस बीच तीन दिन से हो रही बारिश के चलते भवन का एक भाग पिलर समेत जमीन में धंस गया। देखते ही देखते पूरी इमारत ढह गई। जिसमें मालिक निपेंद्र, राजू, आशीष, अंकित तो चपेट में आने से घायल हो गये। जबकि ठेकेदार का बेटा आशीष (20) पुत्र गुलाब सिंह और मजदूर रमेश (45) निवासी शिवपुरम मलबे में दब गये। कंट्रोल रूम की सूचना पर सीओ ब्रह्मपुरी और एसओ परतापुर के अलावा एसडीएम सदर रितु पूनिया, एमडीए सचिव अवनीश शर्मा, अपर सचिव बैचनाथ, सीएमओ डॉ रमेश चंद्रा, एफएसओ मुकेश कुमार, तहसीलदार रमेशचंद कई थानों की फोर्स और फायर ब्रिगेड के साथ मौके पर पहुंचे। घायलों को तुरंत अस्पताल भिजवाया गया। अफसरों ने एमडीए और नगर निगम की पांच जेसीबी, तीन बड़ी क्रेन और गैस कटर लगवाकर पिलर और सरिये कटवाकर बचाव कार्य शुरू कराया। रात करीब नौ बजे एनडीआरएफ की टीम भी गाजियाबाद से पहुंच गई। डॉग स्क्वाएड द्वारा सर्च अभियान के बाद दबे लोगों के लिए बचाव कार्य चल रहा है।
बिना नक्शा पास थी इमारत
एमडीए के जोन ए में यह दोमंजिला इमारत बिना नक्शा स्वीकृत कराए ही बनाई जा रही थी। क्षेत्रीय जेई या जोन प्रभारी का ध्यान उधर था ही नहीं, या खेल सेटिंग का था। यह जांच के बाद ही पता चलेगा। करीब ढाई माह पूर्व भी गढ़ रोड पर भी ऐसी ही एक इमारत गिर गई थी, जो इसी तरह से अवैध रूप से बन रही थी। एमडीए वीसी योगेंद्र यादव का कहना है कि यह बात सही है कि इस भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं था। हालांकि निर्माण सामग्री किस मानक की इस्तेमाल हो रही थी, एमडीए को यह जांचने का तो अधिकार ही नहीं है। पहला दोषी तो अवैध रूप से निर्माण करने वाला ही है। बावजूद इसके यह चूक है और इस पर जांच कर निश्चित रूप से संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पर एक्शन होगा।