सरधना। विकास खंड सरूरपुर के गांव मुल्हेड़ा में करीब डेढ़ सौ साल पुराने सती स्थल पर पूजा की अनोखी परंपरा है। जहां गांव व आसपास के लोग आज भी पुरानी परंपराओं को श्रद्धा के साथ निभाते आ रहे हैं।
गांव मुल्हेड़ा में परंपरा है कि यहां शादी होने के बाद गांव में आए दूल्हा-दुल्हन घर जाने से पहले सती स्थल पर पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही होली पर महिलाओं द्वारा सती स्थल पर पूजा करना पिछले डेढ़ सौ साल से आस्था बना हुआ है।
गांव मुल्हेड़ा में बपारसी रोड पर सती स्थल मौजूद है, जो कि पिछले करीब डेढ़ सौ साल से आस्था का केंद्र बना हुआ है। सती स्थल को लेकर कई तरह की मान्यताएं भी हैं। ग्रामीण बिजेंद्र, आदेश, मेघराज सिंह, सुखपाल सिंह, रतन सिंह आदि ने बताया कि सती स्थल पर होली के दिन विधिविधान के साथ पूजा कर पुरानी परंपरा को आस्था के साथ निभाया जाता है। होली के दिन महिला सती स्थल पर घर की खुशहाली और अपने पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं। इसी के साथ एक खास परंपरा यह भी है कि जब नव दंपती गांव में प्रवेश करते हैं तो घर जाने से पहले सती स्थल पर पूजा करने की अहम मान्यता है। इस परंपरा को पूरा करने के बाद ही नव दंपती अपने घर की दहलीज पर कदम रखते हैं। सती स्थल के पास ही होलिका दहन होता है।
सती स्थल के बारे में मान्यता है कि करीब डेढ़ सौ साल पहले विवाहिता अपने मायके हरियाणा गई हुई थी। कुछ समय बाद उसके मन में अहसास हुआ कि गांव मुल्हेड़ा निवासी उसके पति के साथ कोई अप्रिय घटना हुई है। तभी विवाहिता अपने मायके वालों के साथ मुल्हेड़ा के बाहरी छोर पर पहुंची तो रास्ते में उसके पति की अर्थी श्मशान जाती मिली। महिला गांव में अपनी ससुराल जाने के बजाए पति की चिता में बैठकर सती हो गई थी।
मंदिरों में भी फागोत्सवों की धूम
परंपरा के तहत गांव में फाल्गुन और होली के लोक गीतों की बयार जारी है। रात तक गली-मोहल्लों में थाप के साथ होली के गीतों की धमाल रहती है। फाल्गुन के महीने में मंदिरों में भी फागोत्सवों की धूम है। वहीं भक्तों द्वारा सती स्थल व बरामदे में ही स्थित मंदिरों में भगवान की गुलाल व फूलों से होली खेली जाती है।