निजीकरण के विरोध में बैठक करते अभियंता संघ के पदाधिकारी
- विद्युत परिषद अभियंता संघ के चिंतन मंथन शिविर में लिया गया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की ओर से रविवार को मेरठ में चिंतन मंथन शिविर का आयोजन किया गया। संघ के सभी पदाधिकारियों ने निजीकरण का विरोध किया। शिविर में निर्णय लिया गया कि जब तक पूर्वांचल और दक्षिणांचल के निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया जाता, तब तक कर्मचारियों का संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन को और तेज गति के साथ शुरू किया जाएगा।
शिविर में मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे रहे। उन्होंने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया। उन्होंने तीनों बिंदुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का विश्लेषण किया। इसके आधार पर बताया कि तीनों ही विकल्प बिजलीकर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे। इसलिए निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
दिल्ली विद्युत बोर्ड के पूर्व इंजीनियर सत्यपाल और यशपाल शर्मा ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजलीकर्मियों और अभियंताओं की दुर्दशा के बारे में बताया। इसके साथ ही निजीकरण के विरोध में आंदोलन और तेज गति से करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान अभियंता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोजक सीपी सिंह, आलोक त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।