मेरठ। खेलों को खास तवज्जों मिलने के बाद बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। इससे खेल बाजार की सूरत बदल गई। वहीं, उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ नकली उत्पाद तैयार करने वालों ने भी जड़ें जमा ली हैं।
ब्रांडेड की तरह हूबहू दिखने वाला नकली सामान तैयार कर देश के कोने-कोने में बेचा जा रहा है। शहर में नकली समान की कई बड़ी खेप पकड़े जाने से इसकी पुष्टि हो चुकी है। शहर का स्पोर्ट्स बाजार पिछले कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान बनाने में कामयाब हुआ। देशभर के बाजारों ने भी शहर के स्पोर्ट्स बाजार पर विश्वास जताया। यही वजह है कि यहां के स्पोर्ट्स कारोबार में खासा उछाल आया है। अब इस क्षेत्र में अनैतिक कारोबार से जुड़े लोगों ने जड़े जमानी शुरू कर दी हैं। नकली उत्पाद तैयार कर न केवल हर साल लाखों-करोड़ों रुपये राजस्व की चोरी कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से खेल और खिलाड़ियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। सिविल लाइंस, लालकुर्ती, टीपीनगर, ब्रह्मपुरी, मेडिकल, परतापुर थाना क्षेत्र नकली सामान बनाने का गढ़ बन चुके हैं। नकली उत्पाद बनाने के धंधे में तीन साल में खासी रफ्तार आई है। गुरुग्राम की ब्रांड प्रोटेक्टर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अफसरों की माने तो हर साल होने वाली छापे की कार्रवाई में इजाफ़ा हुआ है। अकेले मेरठ में दो सालों में 60 से ज्यादा कार्रवाई हुई। इनमें क्रिकेट बैट, क्रिकेट बाल के अतिरिक्त ब्रांडेड कंपनियों के बैडमिंटन, फुटबॉल, वॉलीबाल और टेनिस बॉल का भंडाफोड़ किया। ब्रांड प्रोटेक्टर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक धीरेंद्र सिंह की माने तो हर साल अकेले मेरठ शहर से 250 से 300 करोड़ के राजस्व की चोरी हो रही है। कोलकाता, राजस्थान, उड़ीसा, इंदौर जैसे बड़े-बड़े शहर नकली खेल उत्पाद से पटे हैं। येे मेरठ से सप्लाई किए गए हैं। वह बताते हैं कि स्पोर्ट्स के बड़े ब्रांड का डुप्लीकेट सामान बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है। जिससे मेरठ की छवि खराब हो रही है।