9ए - मोहर्रम में तकरीर करते मौलाना। (फलावदा)
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मजलिसों का सिलसिला जारी, खिताब फरमाया
मवाना। मोहर्रम की तीन तारीख को सभी अजाखानों में मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। पहली मजलिस इमामबाड़ा दरबारे हुसैनी में हुई। इसमें मिम्बर से मौलाना मौहम्मद अली ने, दूसरी मजलिस इमामबाड़ा कोटला में हुई। इसमें करार ने फजायल व मसायब बयान किए।
रात में पहली मजलिस इमाम बारगाह जहरा कोटला में तथा दूसरी मजलिस इमामबाड़ा खैरात अली में हुई। इसमें सोगवारों ने अपने आंसुओं को रुमाले सय्यदा को पेश किए और पुरसा दिया। तीसरी मजलिस इमाम बारगाह तिहाई में हुई। जिसको शाहिद रिजवी ने बयान फरमाया। वहीं कस्बे में कानी पट्टी स्थित इमामबारगाह में मोहर्रम के सिलसिले की तीसरी मजलिस हुई। इसमें मरसिया खानी मोहम्मद नबी व विकार नबी ने की। मजलिस में आली जनाब मौलाना नैयर नकवी ने खिताब फरमाया। उन्होंने बताया कि हुसैन चरागे हिदायत हैं, यानी एक ऐसा चरागे हिदायत जो जब भी रोशन होगा उस वक्त मेरा हुसैन एक ऐसी रोशनी बनकर आएगा जो तारीकी वादियों में चले गए हैं। 14 सौ साल पहले जब यजीद शरीयत ए पैगंबरी और हुकुम इलाही को लोगों के दरमियान गलत तरीके से पहुंचा रहा था और इंसानियत को एक तारीकी वादियों में धकेल रहा था तब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ऐसा चरागे हिदायत बनकर खड़े हुए की यजीद के सारे गलत मंसूबों पर पानी फेर दिया। इमाम हुसैन व उनके कुनबे की शहादत सुनते ही सोगवार फूट-फूटकर रोने लगे। इस मौके पर मौलाना मुजम्मिल हुसैन, सपा नेता शाही अब्बास, ऑन मोहम्मद, चांद राजा, जरी अब्बास, मौलाना हैदर, दिलदार रजा, काजिम रिजवी, अली अफशान आदि लोग मौजूद रहे।