राज राजेश्वरी मंडप में श्रीमद्भागवत कथा में वामन अवतार, श्रीराम जन्म की कथा सुनाई
- श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर गूंजे जयकारे
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस बाल कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भरत चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति, संस्कार और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है।
प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और हिरण्यकशयपु की यातनाओं के बावजूद भक्त प्रह्लाद ने भगवान श्रीहरि की भक्ति नहीं छोड़ी। उनकी अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण कर भक्त की रक्षा की। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास हो तो भगवान स्वयं भक्त की रक्षा के लिए उपस्थित होते हैं।
समुद्र मंथन प्रसंग में क्षीरसागर के मंथन से चौदह रत्नों के प्रकट होने, भगवान शिव द्वारा हलाहल विष ग्रहण कर संसार की रक्षा करने तथा भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश लेकर प्रकट होने की कथा सुनाई गई। वामन अवतार में राजा बलि के दान, समर्पण और वचन पालन का प्रसंग सुनाया गया।
भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग आते ही कथा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण जन्म की मनोहारी कथा सुनाई गई।
भगवान के चरित्र हमें सत्य, त्याग, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देते हैं। मंडपाचार्य आचार्य ध्रुव वशिष्ठ ने आज के यजमान सतीश गुगलानी से सपत्नीक व्यास पूजन संपन्न कराया। कथा में महापौर हरिकांत अहलूवालिया, विनीत शारदा, आलोक सिसौदिया, नीरज अरोड़ा, हरीश अरोड़ा, शिवम, प्रवीण अरोड़ा रहे।