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Meerut News: पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी की सेवाओं को याद किया

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- आर्य समाज थापरनगर में हुआ रविवारीय सत्संग
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में विलक्षण प्रतिभा के धनी पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी का 162वां जन्मदिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। आर्य समाज के प्रधान राजेश सेठी ने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती के अनन्य भक्त गुरुदत्त विद्यार्थी का जन्म 26 अप्रैल 1864 को अविभाजित भारत के मुल्तान में रामकृष्ण सरदाना के परिवार में हुआ। इस दौरान आर्य समाज में उनके योगदान और सेवाओं को याद किया गया।
उन्होंने कहा कि बाल्यकाल से ही वे अत्यंत मेधावी थे। प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई। जहां उन्होंने उर्दू और अंग्रेजी का अध्ययन किया। आगे चलकर उन्होंने संस्कृत का गहन अध्ययन करते हुए अष्टाध्यायी कंठस्थ कर ली। केवल 16 वर्ष की आयु में वे आर्य समाज मुल्तान के सदस्य बने। आगे की शिक्षा के लिए लाहौर गए। जहां उनकी मित्रता लाला लाजपत राय और महात्मा हंसराज से हुई और वे आर्य समाज लाहौर से जुड़ गए। डीएवी कॉलेज की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने धन संग्रह के लिए विभिन्न स्थानों पर प्रवचन देकर बड़ी राशि जुटाई।
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आर्य समाज के प्रचार प्रसार में निरंतर सक्रिय रहने के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। 19 मार्च 1890 को मात्र 26 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर लाला लाजपत राय ने भी समाज और राष्ट्र के लिए समर्पण का मार्ग अपनाया। कार्यक्रम में भजन प्रस्तुत किए गए और स्वामी ब्रह्मानंद जी ने महर्षि दयानंद के विचारों के प्रचार पर बल दिया। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ सम्पन्न हुआ। संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया।
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