टेलीकॉम कंपनी कर रही हैं काम
एसपी देहात अविनाश पांडेय का कहना है कि दूरसंचार मंत्रालय अगले वर्ष से इस पर काम करने जा रहा है। सॉफ्टवेयर में ऐसा सिस्टम रहेगा जिससे कोई भी एक्सपर्ट मोबाइल रूट फंक्शन में छेड़छाड़ नहीं कर सकता। यदि आईएमईआई नंबर बदला है तो टेलीकॉम कंपनी को मैसेज पहुंच जाएगा और वह मोबाइल फोन भी ब्लॉक हो जाएगा।
पकड़ा जा चुका है फर्जी एक्सचेंज
गंगानगर में 16 जनवरी 2015 को पुलिस व साइबर सेल ने बीएसएनल के फर्जी एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया था। मौके से बीएसएनएल के 64 सिम, राउटर वाई-फाई और जेएस मॉडम व उपकरण बरामद कर विकास, मामचंद, वसीम, सिकंदर, उस्मान और निशांत जेल भेजे थे। देवबंद निवासी छात्र वसीम की आईडी पर यह मकान किराए पर लिया था। जिसे गंगानगर में साइबर कैफे चलाने वाले विकास ने दिलाया था। इसमें बीएसएनएल देवबंद टेलीफोन एक्सचेंज के दो अस्थायी कर्मचारी भी जुड़े थे।
फर्जी एक्सचेंज चलाने के गैंग का सरगना और मुख्य आरोपी हर्ष अग्रवाल उर्फ हैप्पी उर्फ जैक उर्फ हरीश कुमार पुत्र शंकरलाल निवासी मलक पैंठ हैदराबाद है। जिसकी पुलिस ने संपत्ति भी कुर्क की थी। जांच में सामने आया था कि बीएसएनएल के इस फर्जी एक्सचेंज से देश-विदेश में करीब 84 हजार इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल्स की गई थीं। सरकार को इनकमिंग कॉल के हिसाब से टैक्स मिलता है। मुख्य आरोपी ने अवैध रूप से वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) सेटअप लगाया था। जिसमें देवबंद से फर्जी आईडी पर लिए बीएसएनएल के 64 सिमों का प्रयोग हुआ था। इस फर्जी एक्सचेंज से विदेशी कॉल के मिनट बेचकर सरकार को 3.56 करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया था। हालांकि आरोपी अभी तक पकड़ा नहीं जा सका।
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