हर साल दो करोड़ की गोलियां खा रहे
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक हर साल करीब दो करोड़ रुपये से ज्यादा की नींद से संबंधित गोलियां लोग खाते हैं।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि कम सोने का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग तरोताजा नहीं हो पाता है।
शरीर के विषाक्त पदार्थ नहीं निकलते
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि जिस समय हम सोते हैं, हमारे कई अंग शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करने का काम करते हैं। इससे हम फ्रेश रहते हैं। नींद पूरी न होने से ये विषाक्त पदार्थ नहीं निकलते।
बदल रही दिनचर्या
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि नींद न आने की सबसे बड़ी वजहों में बदला हुआ लाइफ स्टाइल है। पहले लोग शारीरिक मेहनत करते थे। पसीना निकलता था, सूरज की रोशनी में रहते थे। रात में छतों पर सोते थे। शाम को जल्दी खाना खा लेते थे। अब सब उल्टा है।
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