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प्रशासन की अनदेखी से खतरे में है पांडवों के तालाब का अस्तित्व

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करनावल जंगल में स्थित महाभारत कालीन तालाब। - फोटो : SARDANA
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प्रशासन की अनदेखी से खतरे में है पांडवों के तालाब का अस्तित्व
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सरूरपुर। मेरठ जनपद में आज भी भारतीय संस्कृति व ऐतिहासिक स्थलों की झलक देखने को मिलती हैं। मेरठ शहर से मात्र 25 किमी दूरी पर स्थित नगर पंचायत करनावल में आज भी महाभारतकालीन धरोहर के रूप में तालाब स्थित हैं। प्रशासन की अनदेखी के कारण अब इसका अस्तित्व खतरे में पड़ा गया है। मान्यता है कि अनेक लोग पीलिया, बांय व ज्वाइंडस जैसी बीमारी से निदान के लिए दूर-दूर से यहां आते हैं।
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कस्बा करनावल के पूर्वी दिशा में पाथौली मार्ग पर लगभग तीन सौ मीटर दूरी पर यह तालाब स्थित हैं। महाभारतकालीन धरोहर की उपेक्षा के चलते ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति रोष हैं। करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह तालाब वर्तमान में एक बीघा में ही सिमट कर रह गया हैं। कस्बा वासी राहुल जड़ौदिया, सुबोध, रामपाल सिंह, राकेश शर्मा, सतेंद्र कुमार, देवेंद्र सिंह, संजीव फुगाट, पवन, सुखपाल कादियान ने बताया कि यहां दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। वे एक सफेद कागज पर सात तरह की दाल चढ़ाकर उस पर सवा रुपये का दान रखते हैं। इसके बाद पूजा करने के बाद स्नान करते हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों को ईंख के खेतों से होकर जाना पड़ता हैं। रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। उसके बाद इसी तालाब में राखी विसर्जित करते हैं। मान्यता है कि महाभारत के समय में वनवास के दौरान पांडवों के साथ कुंती ने रास्ते में आराम कर इसी तालाब किनारे विश्राम किया था। तब से इसका नाम पांडव तालाब पड़ गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस तालाब पर चार दीवारी के साथ स्नान करने वालों के लिए जंजीर बांधने के साथ सीढ़ियां बनाने की मांग की है। इस संबंध में नगर पंचायत करनवाल की चेयरपर्सन पुष्पा देवी ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहर को संजोय रखना नगर पंचायत का दायित्व है। इसको लेकर डीएम को अवगत कराया जाएगा। साथ ही संबंधित विभाग के मंत्री को भी इसके सौंदर्यीकरण के लिए मांग की जाएगी।
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