सरधना। काशी बनारस से आए आचार्य रहीश मिश्रा महाराज ने प्रवचन के दौरान धर्म के क्षय और अधर्म के उदय पर गहन व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्मी, अहंकारी असुरों का प्रभाव बढ़ने लगता है, तब-तब भगवान ब्राह्मण, गो, देवता, संत और भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।
आचार्य रहीश मिश्रा ने भगवद पुराण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए धर्म की महत्ता और मर्यादा का संदेश दिया। महाराज ने कश्यप और दिती की कथा सुनाते हुए बताया कि सायंकालीन समय में संयम आवश्यक है। जब दिती ने सायंकालीन रति की इच्छा प्रकट की और कश्यप मुनि के मना करने के बावजूद अपनी जिद पर अड़ी रही, तब उन्होंने हरि इच्छा समझकर उसकी इच्छा पूरी की। परिणामस्वरूप, दिती के गर्भ से हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष जैसे राक्षस उत्पन्न हुए। महाराज ने कहा कि सायंकाल भगवान शिव अपने गणों के साथ भ्रमण करते हैं, इसलिए यह समय संध्या वंदन और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है।
आचार्य ने पूतना मोक्ष प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान के पास जिस किसी भी भाव से जाओ, वह कृपा अवश्य करते हैं। उन्होंने बताया कि पूतना भगवान को मारने की नीयत से उनके पास आई थी, लेकिन बाल गोपाल ने उसकी स्तनपान कराने की भावना को मातृत्व का भाव मानते हुए उसे अपनी माता का स्थान प्रदान किया और उसे मोक्ष प्राप्त हुआ। प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और भगवान की लीला व कृपा के महत्व को गहराई से समझा। महाराज ने अंत में कहा कि ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, छल या शत्रुता से नहीं बल्कि निष्कलंक प्रेम से ही प्रभु को पाया जा सकता है। इस अवसर पर विनय गुप्ता, सुधीर, दीपक, संजय सोनी, निक्की, जॉनी सोम, अनुरोध बंसल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।