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लॉकडाउन लोगों को बना रहा मनोरोगी

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लॉकडाउन लोगों को बना रहा मनोरोगी
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मेरठ। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते घरों में सिमटती दुनिया की स्याह तस्वीर सामने आने लगी है। कोरोना के सुरक्षात्मक उपाय लॉकडाउन लोगों में तनाव एवं अवसाद घर कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन व इंडियन साइकेट्री सोसायटी की रिसर्च रिपोर्ट में यह साबित हुआ है। जिसमें बताया कि लॉकडाउन से मनोरोग के मामले बढ़कर 20 फीसदी हो गए हैं। आम दिनों में औसतन 20 में से एक व्यक्ति परंतु आज पांच में से एक व्यक्ति तनाव, अवसाद एवं एंजाइटी से ग्रस्त है। मनोविज्ञानी हैरान हैं कि लॉकडाउन का सफर आधा ही तय हुआ है परंतु लोगों में गुस्सा सातवें आसमान पर है। ऐसे में लोगों को चिंता, अवसाद और तनाव से निकालना बड़ी चुनौती होगा।
छोटी-छोटी बातों पर आपा खो रहे
24 मार्च को आधी रात लॉकडाउन लागू हुआ। इसके बाद से शहर में ऐसी कई आपराधिक वारदातें हुईं। जिनमें लोगों ने छोटी-छोटी बातों पर आपा खोया है। मंगलवार को हनी गोल्फ कॉलोनी में एंट्री पास को लेकर दो लोगों में फायरिंग हो गई। गोला कुआं क्षेत्र में दोस्तों में मामूली विवाद पर फायरिंग और मारपीट हुई। वहीं, माधवपुरम में युवक पर जानलेवा हमला हुआ। मामूली वजह से उजपी इन वारदातों ने बड़ा रूप ले लिया।
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ये हैं अवसाद के लक्षण
बार-बार तथ्य को चेक करते रहना।
कुछ बुरा होने की आशंका से नींद न आना।
पुरानी बातों को याद कर भावुक हो जाना या डरना।
छोटी-छोटी घटनाओं के लिए ख़ुद को दोषी मानना।
बार बार खाने की इच्छा करना, ज़रूरत से ज़्यादा खाना या भूख का कम हो जाना।
किसी काम में मन नहीं लगना।
बिना वजह रोने के लिए मन करना।
सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, चिड़चिड़ापन, ग़ुस्सा अधिक करना और सारी मेडिकल रिपोर्ट नार्मल आना।
नौकरी छूट जाने, किसी अपने का खो जाने एवं बीमारी से पीड़ित हो जाने का डर
ध्यान, योग और शौक दूर करेंगे तनाव
तनाव एवं अवसाद से बचने के लिए समय का सदुपयोग करें। परिजनों से बातें करें, मनपसंद काम करें। संगीत सुनें, फिल्म देखें, ध्यान, योगा, प्राणायाम नियमित रूप से करें। सात्विक भोजन करें। घर के कामों में मदद कर सकते हैं। दोस्तों एवं रिश्तेदारों सेे सोशल मीडिया पर संपर्क में रहें। सकारात्मक विचार रखें। बच्चों के साथ समय गुजारें। टाइम टेबल बनाएं, रोजाना नहाएं तथा हर रोज कुछ नया करें।
शिकायतों के अंबार से चिंतित पुलिस
लॉकडाउन के दौेरान पुलिस के पास आपसी विवाद संबंधी शिकायतें अधिक पहुंच रही हैं। इनमें अधिकतर पति-पत्नी, बच्चे, पड़ोसी एवं दोस्तों से विवाद संबंधी हैं।
दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर घटा
अकेलेपन और सामाजिक दूरी से बढ़ रहे स्ट्रेस में हार्मोन का नियंत्रण बिगड़ रहा है। सेरोटोनिन का स्तर घटा है। एड्रेनिल और कार्सिकोल हार्मोन का सीक्रेशन बढ़ गया है। इससे लोग तनावग्रस्त हैं। इससे हाइपरटेंशन, ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना, भूख न लगना, नींद न आना, मांसपेशियों में खिंचाव, पेट खराब, नजर कमजोर होना, कई बार अधिक भूख लगना, बार-बार रोने का मन होना, आत्महत्या करने या घर छोड़कर भाग जाने का विचार आने लगता है। चौतरफा डर का माहौल है। इससे बेसब्री बढ़ी है।
हर किसी का अलग तनाव
महिलाओं का घर का काम, परिजनों की जिम्मेदारी उठाने, बच्चों का स्कूल न जाना, बाहर खेलने न जाना, हर समय माता-पिता की डांट सुनना। युवाओं को पढ़ाई, नौकरी, वेतन, दोस्तों के साथ समय न बिताना एवं अकेलापन का तनाव हैं।
लाइव सेशन से कर रहे काउंसिलिंग
अवसाद से उबारने के लिए डॉ. कशिका जैन (मनोविज्ञानी) से फ़ेसबुक लाइव सेशन में सवालों को पूछ सकते हैं। मानसिक समस्या से संबंधित सवाल मोबाइल नंबर (7017088338) पर भेजें और निर्धारित समय पर उस फ़ेसबुक लाइव में इस लिंक पर संपर्क कर सकते हैं। https://www.facebook.com/Dr.Kashika/
वर्जन
शरीर और मन दोनों व्यस्त रहने के आदी हो चुके हैं। ऐसे में लंबे समय तक खाली रहने व सामाजिक तौर पर लोगों से दूर से चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अकेलापन एवं नकारात्मकता हावी होने लगते हैं। इसलिए समय का सदुपयोग करें। बागवानी करें।-डॉ. रवि राणा मनोचिकित्सक
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बच्चे रिएक्ट करते हैं, बड़े खामोश हो जाते हैं। इसलिए नियमित दिनचर्या का पालन करें। कोविड-19 के खतरे और बचाव के बारे में बताएं। -डॉ. कमलेंद्र किशोर, मानसिक रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
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