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नौचंदी मेले की शान...ढाई सौ साल पुराना हलवा-पराठा

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इकरार अहमद....... रंगीन रोशनी से सजा मेला नौचंदी।
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मेरठ। नौचंदी मेले में जाएं और वहां के हवले-पराठे का जिक्र न हो, ऐसा नहीं हो सकता। इस लजीज व्यंजन का नाम सुनते ही इसे खाने की बेताबी बढ़ जाती है। यह हलवा-पराठा भी ऐतिहासिक मेले की शान और सांस्कृतिक धरोहर है। करीब ढाई सौ साल पुराना यह व्यंजन '''' शाही मिठाई '''' के रूप में जाना जाता है। अप्रैल से जुलाई माह तक लोग इस अनूठे स्वाद का लुत्फ उठाने आते हैं।
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इतिहासकार एके गांधी ने बताया कि इस हलवा-पराठा की शुरुआत पाकिस्तान के पेशावर में हुई। इसके बाद यहां नौचंदी मेले में लोगों ने इसक स्वाद चखा। शुरुआत में इसे कुछ चुनिंदा दुकानदारों ने बेचना शुरू किया। बाद में पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों ने इसे इतना पसंद किया कि यह मेले की खास पहचान बन गया।
इसलिए खास है यह व्यंजन
- हवाला पराठा की खासियत इसकी अनूठी बनावट और स्वाद में छिपी है। 2.5 फीट चौड़ा पराठा गोल आकार में बनाया जाता है। इसे तैयार करने में देसी घी और पाम ऑयल का उपयोग होता है। मिष्ठान विक्रेता संदीप बताते हैं कि हलवा पराठा बनाने की प्रक्रिया में बारीकियां और परंपरागत तरीके शामिल हैं। इसकी कीमत 240 रुपये से लेकर 800 रुपये प्रति किलो तक होती है।
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इसके कारीगर भी हैं खास
शहर के लिसाड़ी गेट और बुढ़ाना गेट क्षेत्र में गोकुल, चिरंजी लाल, हरिद्वार वाला, झंडेवाला, बुलंदशहरी होटल, गुलजार और नजीर जैसे मिष्ठान विक्रेता इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाते हैं। कई दुकानदार पीढ़ियों से से जुड़े हैं। मिष्ठान विक्रेता मोबिन, गुलजार और मोहित ने गर्व से बताया कि उनकी पांच पीढि़यां नौचंदी मेले में हलवा-पराठा बेच रही हैं। झंडा होटल के संचालक मोबिन ने बताया कि यह पराठा न स्वाद में लाजवाब है। इसकी बनावट और सुगंध भी अनूठा बनाती है।
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