मेरठ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया फिर से तय होगी। क्योंकि नई आरक्षण नीति को हाईकोर्ट ने नकारते हुए 2015 को आधार बनाकर आरक्षण प्रक्रिया लागू करने को कहा है। अभी शासन से गाइडलाइन जारी नहीं हुई है, लेकिन पंचायत विभाग के सूत्रों के अनुसार अब जो आरक्षण प्रक्रिया होगी, उसमें आंशिक बदलाव ही आएगा।
2015 में जो आरक्षण प्रक्रिया लागू हुई थी। वह पूरी तरह शून्य से शुरू हुई थी, ऐसे में अब इसके आगे का चरण शुरू होना है। उदाहरण के लिए जो सीट 2015 में अनारक्षित थी, वह अब सामान्य जाति की महिला के लिए आरक्षित होगी। जो सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित थी, वह अनारक्षित होगी। आरक्षण के इस चक्र में होने वाले बदलाव को लोग आसानी से समझ जाएंगे और विवाद भी पैदा नहीं होगा। इस प्रक्रिया के तहत अब पूरी उम्मीद की जा रही है कि मेरठ का जिला पंचायत अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होगा।
दावेदारों को लगेगा झटका
आरक्षण ने पंचायत चुनाव में उथल पुथल मचा रखी है। आरक्षण से पहले तमाम दावेदार सक्रिय थे और लाखों रुपया जनता में अपनी पैठ बनाने को खर्च कर चुके थे, लेकिन आरक्षण ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। जैसे ही आरक्षण आया तो दूसरे दावेदार सक्रिय हो गए और चंद दिनों में इन लोगों ने भी संपर्क, दान और दावत में मोटी धनराशि खर्च कर डाली।
ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन
परतापुर। पंचायत चुनाव के मद्देनजर मंगलवार को मेरठ ब्लॉक के ग्राम चंदसारा, खेड़ा बलरामपुर एवं महरौली में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर रहे। उन्होंने कहा कि सरकार बिना भेदभाव विकास कर रही है। उन्होंने योजनाओं की जानकारी भी दी। संचालन वार्ड संयोजक नरेंद्र विकल ने किया। इस दौरान मंडल प्रभारी व क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष बिजेंद्र अग्रवाल, किशोर शर्मा, नितिन कसाना, नरेंद्र विकल मौजूद रहे। संवाद