मेरठ। छावनी क्षेत्र में पीपी एक्ट के तहत जारी नोटिस में आठ बैंक प्रबंधकों को जवाब नहीं देना भारी पड़ गया है। कैंट बोर्ड ने इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। सात बैंक प्रबंधकों ने नोटिस का जवाब दिया है। उसकी पड़ताल की जा रही है। कई के जवाब बोर्ड को तर्क संगत नहीं लगे। इन पर भी कार्रवाई की तैयारी है। कैंट बोर्ड ने प्रबंधकों से संपत्ति के मालिकाना हक की जानकारी मांगी थी।
पिछले दिनों एस्टेट ऑफिसर राजीव श्रीवास्तव की ओर से सदर बाजार, आबूलेन और बांबे बाजार में दुकानदारों और बैंक प्रबंधकों को पीपी एक्ट के तहत नोटिस दिया गया था। इसमें उनसे संपत्ति के मालिकाना हक की जानकारी मांगी गई थी। छावनी क्षेत्र में 15 बैंक और शाखाओं को यह नोटिस जारी किए गए थे। आठ शाखा प्रबंधकों की ओर से कोई जवाब नहीं आया। पीपी एक्ट के तहत लोकसेवक के नोटिस का जवाब नहीं देना अपराध में आता है।
एस्टेट ऑफिसर राजीव श्रीवास्तव के मुताबिक आठ प्रबंधकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। धारा 176 के तहत एक महीने तक जेल का प्रावधान है। नोटिस का गलत जवाब देने पर छह महीने की सजा हो सकती है। जिन सात प्रबंधकों ने जवाब दिया है, उसमें कैंट बोर्ड को कई तर्क संगत नहीं लगे। मसलन कई ने यह जवाब दिया है कि वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लाइसेंस पर काम कर रहे हैं। संपत्ति को लेकर जानकारी नहीं दी है। जिन बैंक प्रबंधकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, उसमें एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, आईसीआईसीआई और केनरा बैंक शामिल हैं। कई शोरूम संचालकों ने भी नोटिस का जवाब नहीं दिया है।
मालिकाना हक गड़बड़
नोटिस जारी करने का मकसद मालिकाना हक को जानना है। कुछ संपत्ति अवैध रूप से खरीदी और बेची गई है। उसका असली मालिक कौन है, यह कैंट बोर्ड को भी नहीं पता। कुछ रजिस्ट्री फर्जी होने के कैंट बोर्ड को सबूत भी मिले हैं। रजिस्ट्री रद्द कराने की तैयारी चल रही है।
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