प्रीत विहार इलाके में डॉक्टर श्रीकांत के अपहरण के मामले में ओला कैब की ओर से घोर लापरवाही बरते जाने की बातें सामने आ रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदमाशों ने ओला से पैसा वसूलने के लिए पांच-छह माह पूर्व योजना बना ली थी। इसके लिए सुशील व अनुज ने फर्जी दस्तावेज से ओला में कैब लगाने की प्रक्रिया शुरू की। प्रक्रिया के दौरान जो भी दस्तावेज दिए गए वह किसी रामबीर नामक चालक के नाम से दिए गए। कैब की मालिक विनिता देवी नामक महिला को बताया गया। आरोपियों ने ओला का वेरिफिेशन करने वाले वेंडर को कुछ रुपये देकर जल्दी ही वेरिफिकेशन करवा लिया। इधर, अभी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी थी कि बदमाशों ने श्रीकांत को प्रीत विहार से अगवा कर लिया।
सुशील व अनुज अच्छी तरह जानते थे कि ओला के सामने साख बचाने के लिए पांच करोड़ की रकम कुछ भी नहीं है। यदि डॉक्टर श्रीकांत को कुछ हो जाता तो इससे पूरे विश्व में ओला की बड़ी बदनामी होती। इसलिए ओला के अधिकारी बदमाशों की मांगों के आगे झुक भी गए।