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शहीद सिपाही की यादों से हुई आंखें नम, इन बातों को जान नहीं रोक सकोगे आंसू

Thu, 04 Jan 2018 01:31 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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गांव पहुंचा सिपाही का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला
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जांबाज सिपाही अंकित तोमर के निधन की खबर आते ही पुलिस में शोक की लहर दौड़ गई। उससे जुड़ी बातों को याद कर साथी पुलिस कर्मियों की आंखें नम हो गई।

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कैराना में तैनात सिपाही अंकित तोमर एक जांबाज सिपाही था और साबिर एनकाउंटर से पहले भी वह बदमाशों की धरपकड़ में हमेशा आगे रहा है। पचास हजार के इनामी फुरकान की गिरफ्तारी में भी अंकित शामिल रहा था और उसे पुरस्कृत करने की संस्तुति के साथ उसका नाम मुख्यमंत्री को भेजा गया था। मुठभेड़ में घायल हुए कैराना कोतवाली प्रभारी भगवत सिंह का मेरठ के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।

बागपत के गांव वाजिदपुर निवासी अंकित तोमर 2011 में यूपी पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुआ। उसकी पोस्टिंग शामली जिले में हुई। पुलिस अधीक्षक ने तेज तर्रार होने पर उसको कैराना कोतवाली में तैनात कर दिया था। 
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कैराना कोतवाली में रहते हुए उसने कई साहसिक कार्य किए, जिनमें आठ अप्रैल 2017 को 50 हजार के इनामी बदमाश फुरकान से हुई मुठभेड़ में भी वह शामिल रहा था। तब कैराना-कांधला मार्ग पर हुई मुठभेड़ में फुरकान ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी थी, जिसमें सिपाही अंकित तोमर और शहजाद घायल हो गए थे। बावजूद इसके इन दोनों सिपाहियों ने फुरकान को दबोच लिया था। जिले में इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी के अभियान में फुरकान की सबसे पहली गिरफ्तारी हुई थी। इसके चलते पुलिस अधीक्षक ने अंकित तोमर को मुख्यमंत्री से सम्मानित कराने के लिए भी नाम भेजा था। उधर, मंगलवार रात जब जंधेड़ी गांव में मुठभेड़ हुई, तो सिपाही अंकित तोमर के सिर में गोली लगी थी।

पढ़ें : जिंदगी की जंग हार गया जांबाज सिपाही, एक लाख के इनामी को किया था ढेर

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मिलनसार और हंसमुख था अंकित

अंकित को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
कैराना में अपनी तैनाती के दौरान अंकित पत्नी और दोनों बच्चों के साथ कैराना के मोहल्ला गुंबद में अरविंद सिंघल के मकान में किराए पर रह रहा था, यहीं पर उसकी पत्नी नेहा ने दो माह पूर्व बेटे को जन्म दिया। बेटा पैदा होने की खुशी में अंकित ने कैराना कोतवाली में कार्यरत सभी पुलिस कर्मियों को दावत दी थी और कोतवाली की मैस में खीर और मटर पनीर की सब्जी बनवाकर खिलाई थी। सिपाही मैनपाल, विकास और अन्य पुलिस कर्मियों का कहना है कि अंकित बहुत मिलनसार था और हंसमुख था। उसका कभी किसी से कोई विवाद नहीं हुआ था। उसके साथियों का कहना है कि अंकित अपनी डयूटी को पूरी गंभीरता से निभाता था और किसी भी परीस्थिति में घबराता नहीं था। उन्होंने कहा कि जांबाज साथी के चले जाने का बहुत दुख है।

परिवार की खुशियों को लगी नजर
किसान जयपाल सिंह के घर में खुशियां ही खुशियां थी। बड़ा बेटा यूपी पुलिस में सिपाही और छोटी पढ़ाई कर रहा था। जयपाल खुद खेती संभालता है। पोते और पोती  से घर के आंगन में चार चांद लगे थे। लेकिन एकाएक मौत की नजर इस परिवार की सबसे बड़ी खुशी अंकित को लग गई। अंकित की मौत से जयपाल और उसका परिवार पूरी तरह टूट गए हैं।

सबका दुलारा था  
पढ़ाई में बेहद होशियार था अंकित तोमर। मोहल्ले के लोग  बताते हैं कि सबके साथ अच्छा व्यवहार उसकी पहचान थी। यूपी पुलिस की भर्ती में पहली ही कोशिश में उसकी नौकरी लग गई। किसान परिवार को बेटे की नौकरी से हिम्मत मिली। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि सादगी पसंद और हमेशा तरक्की की बात करने वाले अंकित के इस तरह चले जाने की किसी को उम्मीद नहीं थी।

बुलेट प्रूफ जैकेट ने बचाई कई पुलिसकर्मियों की जान 
मुठभेड़ के दौरान जब साबिर जंधेड़ी ने कारबाइन से गोलियां चलाईं, तो आदर्शमंडी थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा, शामली कोतवाली प्रभारी अवनीश गौतम, कांस्टेबल नितिन मलिक बुलेट प्रूफ जैकेट की वजह से बाला बाल बचे। एसपी डाक्टर अजयपाल शर्मा के भी सीने पर दो गोलियां लगी, लेकिन बुलेट प्रूफ जैकेट होने के कारण बच गए। यदि पुलिस तैयारियों के साथ मौके पर नहीं पहुंचती तो ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता था।

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