मेरठ। किला परीक्षितगढ़ रोड स्थित बीएनजी कॉलेज के पास सोमवार को भारी तनाव की स्थिति बन गई। यहां मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की टीम गंगानगर एक्सटेंशन योजना के तहत जमीन पर कब्जा लेने पहुंची। जोनल अधिकारी अर्पित यादव के नेतृत्व में भारी पुलिस बल, जेसीबी और दर्जनों मजदूरों के साथ पहुंची टीम को किसानों और महिलाओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। किसानों के उग्र रुख को देखते हुए मेडा की टीम को बिना कब्जा लिए ही खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।
भावनपुर थाना क्षेत्र के बीएनजी कॉलेज के समीप गंगानगर एक्सटेंशन योजना के तहत खसरा नंबर 780, 781 और 782 की भूमि पर मेडा ने कब्जा करने की रणनीति बनाई थी। हालांकि किसान और महिलाएं पहले से ही खेतों में तंबू गाड़कर डटे हुए थे। जैसे ही जेसीबी और मजदूरों ने खेत में प्रवेश करने की कोशिश की वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुछ महिलाएं विरोध स्वरूप जेसीबी के आगे लेट गईं वहीं किसानों ने मजदूरों के साथ धक्का-मुक्की करते हुए उन्हें खेतों से बाहर निकाल दिया। इस दौरान मेडा और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
किसान बोले- बिना मुआवजे के भूमि हड़प रहा प्राधिकरण
धरने पर बैठे किसान वीरेंद्र, मनोज, नरेश, नवाब और देवेंद्र ने आरोप लगाया कि वे पिछले सोमवार से परिवार सहित खेतों में डेरा डाले हुए हैं। किसानों का कहना है कि एक सप्ताह पूर्व भी मेडा की टीम ने सरसों की फसल बरबाद कर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया था। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे जमीन देने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन पहले उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने मेडा की टीम और कुछ चिकित्सकों पर भू-माफिया की तरह व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया। इस दौरान राजकली, पूनम, अर्चना, संगीता, लक्ष्मी, कल्लो, माया, पुष्पा, सुमन, राखी, रामवती, शांति समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
विधायक के आश्वासन की अनदेखी का आरोप
किसानों ने बताया कि इस मामले में विधायक अमित अग्रवाल ने उन्हें आश्वस्त किया था कि 26 दिसंबर को मेडा के उच्च अधिकारियों के साथ वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा। किसानों का आरोप है कि इस आश्वासन के बावजूद अधिकारी तय तारीख से पहले ही जबरन कब्जा करने पहुंच गए जो कि उनके साथ विश्वासघात है।
सदमे में महिला हुई बेहोश, मजदूरी के लिए भटकते रहे श्रमिक
हंगामे के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अपनी जमीन हाथ से जाते देख राजेंद्री नाम की महिला बेहोश होकर गिर पड़ी। अन्य महिलाओं ने उन्हें संभाला। दूसरी ओर मेडा द्वारा बुलाए गए दिहाड़ी मजदूर भी परेशान नजर आए। काम रुक जाने के कारण वे सड़कों पर भटकते दिखे। मजदूरों का कहना था कि उनका पूरा दिन खराब हो गया और अब उन्हें मजदूरी का भुगतान करने वाला भी कोई नहीं है।
मेडा सचिव से वार्ता, मुआवजे पर नहीं बनी स्पष्ट बात
हंगामे के बाद किसान प्रतिनिधि वीरेंद्र और विनोद मोगा मेडा सचिव आनंद कुमार से मिलने पहुंचे। सचिव ने फिलहाल अवार्ड की धनराशि लेने का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसानों की मुख्य मांग यानी पूर्ण और उचित मुआवजे पर कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और किसान अपनी जमीन बचाने के लिए धरने पर डटे हुए हैं।