बेसन में मक्का का आटा व कलर, अरहर और बेसन की दाल में मटर, हल्दी में कलर, मसालों में गेरू रंग, लाल मिर्च में ईंट या बालू चूर्ण, खाने के तेल में आर्जीमोन, चांदी के वर्क में एल्युमीनियम, चावल में कलर, चाय पत्ती में कलर, काली मिर्च में पपीते के बीज, शहद में चीनी और पानी, नमक में मिट्टी या रेत, कॉफी में खजूर या इमली के बीज, दूध में पानी, मक्खन व घी में वनस्पति की मिलावट की जाती है।
इस तरह करें पहचान
- मावा की थोड़ी मात्रा को पानी में उबाले, फिर इसमें आयोडीन की कुछ बूंदे डालने पर नीले रंग की परत बनती है तो स्टार्च की मिलावट होती है।
- एक चम्मच मिर्च पाउडर को पानी से भरे गिलास में डाले। पानी रंगीन होता है तो उसमें ईंट या बालू की मिलावट है।
- चावल को हाथों में रगड़े। अगर हाथों पर रंग लगता है तो कलर की मिलावट है।
- आटा की रोटी कम फूलती है और स्वाद फीका है तो मिलावट है।
- चाय की पत्ती की जांच चीनी मिट्टी के बर्तन या शीशे के प्लेट पर नींबू डालकर उस पर चाय की पत्ती पीसकर डाले यदि नींबू का रस नारंगी या दूसरा रंग होता है तो मिलावट है।
- शहद में रूई के फाहे को भिगोकर उसे माचिस की तीली से जलाएं। यदि रूई का फाहा नहीं जलता तो उसमें चीनी और पानी की मिलावट है।
- नमक को कांच के साफ गिलास में पानी में घोले। कुछ समय बाद अगर रेत मिट्टी होगी तो वह गिलास की तली में बैठती है तो मिलावट है।
- काली मिर्च को पानी में डाल दे। अगर पपीते के बीज है तो वे पानी पर तैर जाएंगे और काली मिर्च नीचे डूब जाएगी।
- दूध में लेक्टोमीटर से पानी की जांच की जा सकती है। शुद्ध दूध का सापेक्षिक घनत्व 1.030 से 1.0354 तक होना चाहिए।
- बेसन का रंग सामान्य पीला होता है, अगर गहरा पीला है तो कलर या आटे की मिलावट होती है।
- सरसों का तेल फ्रिज में रखने नीचे कुछ जमाव होता है तो मिलावट है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेहत पर प्रभाव
सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों में केमिकल या अन्य हानिकारक चीजें मिलाई जाती हैं। जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन करने से पेट की बीमारियां, उल्टी, दस्त, लीवर, किडनी व अन्य कई गंभीर बीमारियां होती है।
तेल में भी मिलावट से इंजन हो रहे खराब
डीजल-पेट्रोल और मोबिल ऑयल में भी केरोसीन आदि की मिलावट की जाती है। ऑटो एजेंसी संचालक महिपाल चौहान का कहना है कि मिलावटी तेल और मोबिल ऑयल से इंजन जल्दी खराब होता है। इंजन के स्पेयर पार्ट्स समय से पहले खराब होने लगते है। साथ ही माइलेज भी कम आता है। वाहन के इंजन को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए शुद्ध तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। जिला पूर्ति अधिकारी ओमहरि उपाध्याय का कहना है कि उनकी जानकारी में तेल में मिलावट का कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर कहीं शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है। जो खाद्य पदार्थ संदिग्ध होते हैं, उनके नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
- मनोज तोमर, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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