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दूल्हों की मालाओं में सज रहे 200 और 50 के नए नोट, जनता की जेब से दूर

Tue, 28 Nov 2017 12:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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दूल्हे की माला में सजे नए नोट - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ। आपने शायद 50 रुपये का नया नोट देखा भी नहीं होगा या 200 का नया नोट हाथ में नहीं लिया होगा। लेकिन माला बनाकर नोट बेचने वालों के लिए इन नोटों की कोई कमी नहीं है। शहर के बाजार में इन नोटों की माला खूब मिल रही है। दूल्हों के लिए बनने वाली इन मालाओं में इस तरह के नोट खूब लगाए जा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि जहां अधिकतर बैंकों में उपभोक्ताओं को नए नोट न होने की बात कही जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ माला बनाने वालों के पास नोटों की कोई कमी नहीं है।
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शहर की एसबीआई चेस्ट ब्रांचों में तीन सप्ताह पूर्व 200 के नोटों की करेंसी आ गई थी। कुछ दिन पूर्व 50 के नए नोट भी आ गए। कैंट स्थित एसबीआई ब्रांच के एजीएम ने दावा किया था कि उनकी चेस्ट ब्रांच से जुड़े शहर के 36 बैंकों को नई करेंसी के 10-10 पैकेट भेजे गए हैं। एक खाताधारक को 10 से ज्यादा नोट नहीं दिए जाने थे। लेकिन ये नोट बैंकों में कब पहुंचे और कब खत्म हो गए, लोगों को इसका पता ही नहीं चला। 50 के नोटों की जानकारी तो किसी को मिली तक नहीं। शादियों का सीजन है, लोग भी चाहते हैं कि शगुन नए नोट से दिया लाए। नए नोट की चाहत में बैंक जाते हैं तो पता चलता है कि नोट खत्म हो गए।

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मालाओं में लगे तो कैसे मिलें

नए नोटों की माला - फोटो : अमर उजाला
नए नोट देखने हैं तो शहर के गुदड़ी बाजार, पीएल शर्मा रोड स्थित कई दुकानों पर जाइये जहां ये नोट मालाओं में  मिलेंगे। यहां इसके रेट भी खूब वसूले जा रहे हैं। 200 के नोटों की पूरी गड्डी की माला लेनी है तोे उसका  रेट 21 हजार है। इसमें बीच में दूसरे नोट भी लगेंगे। तो 50 के नोट की माला साढ़े पांच हजार की मिलेगी। इन दिनों लोगों में 50 और 200 के नोटों का ज्यादा क्रेज है। सवाल उठता है कि जब आम लोगों को ये नोट नहीं मिल पा रहे तो नोटों की माला बनाने के लिए कहां से आ गए ?

करेंसी होती है नष्ट
माला बनाने में नोट को स्टेपल किया जाता है। कहीं पिन ठोंके जाते हैं तो कहीं से नोटों को चिपकाया जाता है। नोटों को मोड़ तरोड़ कर माला में बींधा जाता है। इससे भारतीय मुद्रा नष्ट होती है। रिजर्व बैंक के नियमानुसार नोटों को स्टेपल तक नहीं किया जा सकता है। 

कोट
रीजनल मैनेजर एसबीआई राजेश कुमार ने बताया कि अपने रीजन की सभी ब्रांचों में नए नोट भेजे गए हैँ ओर वहां से मिल रहे हैं। प्रबंधकों से कहा गया है कि वे प्रयास करें कि थोडे़ नोट अधिक से अधिक ग्राहकों को मिलें। दरअसल इनकी मांग बहुत अधिक है इसी वजह से सभी को मिल पाना संभव नहीं है। सप्लाई बढ़ने पर सभी तक नोट पहुंच जाएगा।

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