बृहस्पतिवार को एडीओ (कृषि) महेश कुमार खोखर ने बताया कि बासौली में कृषक ऋषि पाल सिंह के यहां पर लेमन ग्रास के फसल की कटाई देखी। उन्होंने कहा यदि किसान उक्त ग्रास की खेती करके तेल निकाले तो संबंधित किसान की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लेमन ग्रास का क्षेत्रफल बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं।
छह गांवों में होती है लेमन ग्रास की खेती
श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत आठ गांवों का चयन किया। इसमें छह गांव मुकंदपुर, सिलाना, हलालपुर, चंदनहेड़ी, शेरपुर गांव में लेमन ग्रास की खेती कर रहे हैं। अन्य गांवों में भी क्षेत्रफल बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
न खाद की जरूरत और न जानवरों का डर
किसान धर्मेंद्र और ऋषिपाल ने बताया कि लेमन ग्रास खेती में न तो खाद की जरूरत होती है और न ही जंगली जानवरों के फसल नष्ट करने की डर रहता है, इसलिए यह फसल फायदे का भी सौदा साबित हो रही है। एक बार फसल की बुवाई होने के बाद यह निरंतर पांच-छह साल तक चलती रहती है।
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