धू धू कर जल उठा रावण का पुतला
मुजफ्फरनगर। बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक दशहरे का पर्व पूरे जिले में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ मनाया गया। शहर में नुमाइश मैदान और पटेलनगर में ही पुतला दहन का आयोजन हुआ। इस बार केवल दो स्थानों पर ही पुतला दहन हुआ।
नुमाइश मैदान में प्रतिवर्ष यहां पुतला दहन के अवसर पर एक साथ हजारों की भीड़ मौजूद रहती थी। इस बार यह संख्या गिनती में सिमटकर रह गई। खासकर बच्चों की संख्या बहुत कम रही। नुमाइश मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी प्रतिवर्ष से छोटे ही बनाए गए थे। मैदान में रावण के पुतले का दहन किया गया। श्रीराम सेवा दल के कार्यकर्ताओं विनोद खेड़ा, अशोक दूमड़ा, डॉ सुरेश खुराना, कुलभूषण बजाज, डॉ विजय टंडन, प्रवीण खेड़ा, विनोद वाधवा आदि का सहयोग रहा। संचालन सोमनाथ भाटिया ने किया। इस मौके पर कार्यक्रम में प्रदेश के कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, विधायक उमेश मलिक, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे।
उधर, पटेलनगर में रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन हुआ। यहां भी प्रत्येक वर्ष की अपेक्षा कम ही भीड़ रही। पहले रामलीला का मंचन हुआ, इसके बाद पुतला दहन किया गया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, सपा नेता गौरव स्वरूप, सतीश गोयल अतिथि रहे। रामलीला समिति के विकल्प जैन, अनिल ऐरन, सुरेश मंगल, हरीश पालीवाल, सत्यप्रकाश, नीरज ऐरन आदि का सहयोग रहा।
कोराना के पुतले का हुआ दहन
मुजफ्फरनगर। नुमाइश मैदान में इस बार कोरोना के पुतले का भी दहन किया गया। यह उम्मीद की गई कि रावण जैसी बुराई के साथ कोविड का अंत भी हो जाएगा।
न लगे मेले, न आए बच्चे
मुजफ्फरनगर। दशहरा पर्व पर रावण दहन के के साथ सभी जगह मेलों का आयोजन होता था। इन मेलों में महिलाओं और बच्चों की भीड़ रहती थी। इस बार कोरोना महामारी के चलते न तो कहीं भी मेलों का आयोजन हुआ और न ही महिलाओं और बच्चों की भीड़ दिखाई दी। शहर के नुमाइश मैदान में भी मेला नहीं लगा और पटेल नगर की भी यही स्थिति रही। इन मेलों में दुकानें लगाने वालों को इस बार बड़ा नुकसान हुआ है और उनकी रोजी रोटी प्रभावित हुई है।
दशहरा पर्व पर पुतला दहन में युद्व को ललकारता राम की वेषभूषा में कलाकार।- फोटो : MUZAFFARNAGAR