गन्ना विभाग माफिया से पार नहीं पा सका है। पिछले साल 7186 मृत किसानों के बांड निरस्त करने वाले गन्ना विभाग को इस बार मंडल के पांच जिलों में कराए गए सर्वे में 7996 मृत किसानों के नाम पर बांड चलते मिले। गन्ना माफिया और रसूखदार किसान समिति एवं मिल कर्मियों की मिलीभगत से बांड में अभी भी खेल कर रहे हैं।
माफिया ने किसान के नाम के आगे कुमार एवं सिंह आदि लगाकर डबल बांड बनवाए हैं। इससे किसान की कम रकबे में दोगुनी पर्ची हो जाती हैं। इससे वह समय से पहले गन्ना मिल में डाल देता है। उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र के अनुसार मंडल में 947 किसानों के बांड डबल मिले हैं। इसी तरह राजस्व विभाग से खसरा-खतौनी की जांच कराने के बाद 1800 किसानों के पास वास्तविक के मुकाबले तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा दर्ज मिला है।
गन्ना विभाग द्वारा संचालित गन्ना विकास समितियां, शुगर मिल और किसानों के बीच सेतु का काम करती हैं। गन्ना एक्ट के मुताबिक किसान शुगर मिल को गन्ना समितियों के माध्यम से आपूर्ति करते हैं। इसके लिए किसानों को निर्धारित फीस देकर गन्ना विकास समिति का सदस्य बनना पड़ता है। समिति अपने सदस्यों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए बांड (अनुबंध पत्र) जारी करती हैं। इसके आधार पर किसान मिल को गन्ना आपूर्ति करते हैं।
बागपत में डबल बांड के सबसे ज्यादा मामले
जिला भूमिहीन फर्जी किसान मृत किसान डबल बांड
मेरठ 54 01 1389 87
बागपत 426 27 3220 609
गाजियाबाद 08 00 44 06
हापुड़ 135 00 1918 83
बुलंदशहर 84 00 1425 162
कुल 707 28 7996 947
रिकॉर्ड कर रहे दुरुस्त
किसानों के भू-अभिलेखों की राजस्व विभाग से जांच में वास्तविक के मुकाबले तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा मिला। 7996 मृत किसानों के बांड चलते मिले। रिकॉर्ड को दुरुस्त करा दिया है।
- राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त, मेरठ मंडल