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मंदिर की पहचान में साक्ष्य बना था मेरठ की बेटी का खींचा छायाचित्र, अमर उजाला से साझा कीं यादें...

Wed, 05 Aug 2020 02:17 PM IST
कपिल kapil शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
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डॉ. सुधा मलैया और 1992 में यह दल अयोध्या गया था। इसमें डॉ. सुधा भी शामिल थीं। - फोटो : अमर उजाला
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श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के मंदिर के शिलान्यास में मेरठ की बेटी इतिहासकार डॉ. सुधा मलैया की भी खासी भूमिका है। विवादित ढांचा ढहाए जाने के दौरान छह दिसंबर 1992 में डॉ. सुधा मलैया ने 12वीं शताब्दी के विष्णुहरि शिलालेख (करीब 5 फीट लंबे व 2 फीट चौड़े) बलुआ पत्थर पर लिखी पंक्तियों को कैमरे में कैद किया था। इस स्तंभ में 11वीं शताब्दी की नागरी लिपि में उच्च संस्कृत में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का शिलान्यास पत्थर था। शिलालेख की इसी पुरानी तस्वीर को न्यायालय में मंदिर के इतिहास की पहचान का आधार बनाया गया था। मंगलवार को अयोध्या में भूमि पूजन में शामिल होने पहुंचीं डॉ. सुधा ने अमर उजाला से फोन पर बात कर 1992 का वाक्या साझा किया।

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रानी मिल निवासी इतिहासकार सतीश जैन की छोटी बहन डॉ. सुधा मलैया ने 1992 में विवादित ढांचे की तस्वीरें खींची थीं। डॉ. सुधा ने बताया कि नौ दिसंबर को विश्व हिंदू इतिहास फोरम की ओर से छह लोगों को अयोध्या भेजा गया था। उस दल में मैं भी थी। फोटोग्राफी का शौक था। अपने साथ रील और वीडियोग्राफी के लिए चार कैमरे ले गई थीं। जिनसे शिलालेखों की तस्वीरें उतारीं। इसके बाद 13 दिसंबर को पुन: फैजाबाद से बाइक पर अयोध्या जाकर मलबे से कुछ साक्ष्य खोजे। उस वक्त ढांचा ढहाया जा रहा था। ये शिलालेख मंदिर के मुख्य गुंबद के पीछे की दीवार के थे। जो मलबे में दबाए जा रहे थे।

विष्णुहरि शिलालेख था अहम
छह दिसंबर को विवादित ढांचे के मलबे से मिले 12वीं शताब्दी के मंदिर का प्रतिष्ठा संबंधी विष्णुहरि शिलालेख बेहद अहम था। मैं उसकी आंखों देखी गवाह थी। 6 व 7 दिसंबर को कर्फ्यू के बीच जाकर मैंने वे तस्वीरें खींची थीं। इस शिलालेख में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और उसका निर्माण कराने वाले राजा अनयचंद्र, साकेतमंडल व राजधानी अयोध्या का विवरण है।
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डॉ. सुधा 20 दिसंबर 1952 को रानी मिल कंपाउंड मेरठ में जन्मी थीं। पिता शिखरचंद जैन, माता कैलाशवती जैन हैं। बड़े भाई इतिहासकार डॉ. सतीश जैन और पति जयंत मलैया हैं। आरजी कॉलेज से बीएससी किया। एमए प्राचीन इतिहास में किया। इसके बाद सागर विवि से कला व संगीत में डॉक्टरेट किया। 1988 में एलएलबी भी किया। वेणीमाधव पुरस्कार मिला। मध्य प्रदेश से ओजस्विनी समदर्शिनी व्यास पत्रिका निकालती हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।
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छोटी बहन सुधा प्रारंभ से ही बहुत मेधावी छात्रा रही हैं। लॉकडाउन से पहले मेरठ आई थीं। 1992 में उनके द्वारा खींची गई तस्वीर को ही न्यायालय में शिलालेख की पहचान का आधार बनाया गया था। सामाजिक जीवन में काफी सक्रिय हैं। इस समय अयोध्या भूमि पूजन में पहुंचीं हैं। - सतीश जैन, इतिहासकार

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