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UP: महंगाई की मार से बिगड़ गए हालात, तिरंगे की 80 फीसदी घट गई मांग, पढ़ें लालकिले से जुड़ी ये दिलचस्प बात

Fri, 29 Jul 2022 03:12 PM IST
कपिल kapil ऋषिपाल सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ

सार

महंगाई की ऐसी मार पड़ी कि गांधी आश्रम में बने खादी के तिरंगे की 80 फीसदी मांग घट गई है। खास बात यह है कि आजादी के बाद पहली बार लालकिले पर मेरठ के नत्थे सिंह का बनाया तिरंगा लहराया था।  
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रमेश - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ में गांधी आश्रम में चरखे से तैयार खादी से बने तिरंगे की मांग घट गई है। वर्ष 2019 में यहां 12 हजार तिरंगे बने थे, जबकि इस बार सिर्फ दो हजार का ही ऑर्डर मिला है। मेरठ के गांधी आश्रम में नत्थे सिंह द्वारा बनाया गया तिरंगा ही आजादी के बाद पहली बार लालकिले पर फहराया गया था। तभी से मेरठ में बने खादी के तिरंगों की मांग देशभर में रहती आई है। 

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गांधी आश्रम की स्थापना 1920 में हुई थी। प्रधान कार्यालय बनारस से वर्ष 1926 में मेरठ लाया गया। यहां कारीगर नत्थे सिंह तिरंगा झंडा बनाते थे। वर्ष 2019 में नत्थे सिंह का निधन हो गया। अब उनके बेटे रमेश यहां तिरंगा बनाते हैं। रमेश बताते हैं कि कपास के रेट तीन वर्ष पहले तक 6700 रुपये क्विंटल के आसपास थे जो अब बढ़कर 11 हजार तक पहुंच गए हैं। एक हजार मीटर धागा जो तब 70 रुपये का आता था अब 120 रुपये का है। ऐसे में तिरंगे के ऑर्डर न होने के कारण रमेश परेशान हैं। दो बेटियों के हाथ पीले करने की चिंता है। पैसे कम मिलने के चलते उनके भाई बाबू ने कार्य छोड़ दिया है। 

कारोना से बिगड़े हालात 
प्रदेश में तीन शहरों मेरठ, बाराबंकी और अकबरपुर में गांधी आश्रम समिति की ओर से तिरंगा बनाया जाता है। मेरठ में ही छपाई, कताई, बुनाई और सिलाई होती है। पहले यहां का तिरंगा सरकारी स्कूलों, कार्यालयों आदि में काफी संख्या में जाता था। कोरोना के बाद से यहां लगातार हालात खराब होते चले गए।
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कम होते गए कारीगर, बजट भी नहीं रहा 
समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि उनके पास अन्य कई जिलों से ऑर्डर आते थे। कोरोना के बाद से बहुत कुछ बदल गया। दो साल में कारीगर भी कम हुए और कमाई भी। कच्चे माल के दाम बढ़ गए। निजी कंपनियों ने पोलिस्टर के तिरंगे अधिक बनाने शुरू कर दिए जो आजकल काफी चलन में है। इस समय महंगाई के चलते खादी के तिरंगों की डिमांड कम हो गई है। वर्तमान में समिति के आठ बिक्री स्टोर हैं और चार उत्पादन केन्द्र हैं। समिति पर करोड़ों रुपये का कर्ज भी है।

यह भी पढ़ें: UP: मानव तस्करी के खुले चौंकाने वाले राज, पुलिस अफसर भी हैरान, ये बड़ा लालच देकर लाते थे गरीबों के बच्चे

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झंडे का साइज और         मूल्य 
लंबाई           चौड़ाई        

 45           70           300
 60           90           400
 90          135          450 
 120       180           850
नोट: झंडे की लंबाई-चौड़ाई सेंटीमीटर में, मूल्य रुपये में है। 

खरीदकर लगाना होगा तिरंगा 
हर घर तिरंगा अभियान के तहत 11 से 17 अगस्त तक चलने वाले अभियान के लिए राष्ट्रीय ध्वज मुफ्त में नहीं दिया जाएगा। सिविल लाइंस स्थित सरस एवं अन्य केंद्रों पर राष्ट्रीय ध्वज पांच से दस रुपये में मिलेगा। मुख्य विकास अधिकारी शशांक चौधरी ने कहा कि बेसिक और माध्यमिक स्कूल के छात्र-छात्राएं घर पर तिरंगा लगाएंगे। 
 
नारा लिखिए, पुरस्कार जीतिए 
हर घर तिरंगा अभियान के लिए आप स्वरचित नारा संस्कृति मंत्रालय के ई-मेल एकाउंट पर भेज सकते हैं। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को पांच, तीन और दो हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। पांच प्रतियोगियों को एक हजार रुपये की कासांत्वना पुरस्कार मिलेगा। कम से कम एक और अधिकतम तीन नारे भेज सकते हैं। नारा harghartirangaup@gmail.com पर भेजना होगा।
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