उत्तर प्रदेश के बिजनौर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए उपद्रव के पांच आरोपियों की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। जमानत याचिका पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) संजीव पांडेय की अदालत में सुनवाई हुई।
शासकीय अधिवक्ता संजीव वर्मा ने बताया कि 20 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में नहटौर में उपद्रव मचाया गया था। मोहल्ला नेजोसराय के पास करीब 600 उपद्रवियों ने पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की थी और पुलिस की जीप को आग लगा दी थी। पुलिस ने मामला शांत करने का प्रयास किया, तो उपद्रवियों ने उपनिरीक्षक आशीष तोमर से पिस्टल छीन ली थी। एक युवक ने पुलिसकर्मी मोहित शर्मा पर फायर भी किया था। पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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वहीं आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट से भी जब भीड़ काबू में नहीं आई तो अधिकारियों ने फायरिंग के आदेश दिए। पुलिस ने सलीम अहमद, मोहम्मद आकिब, शकील अहमद, साजिद अहमद उर्फ काले और सादिक को मौके से गिरफ्तार किया था। सलीम अहमद से तलवार, मोहम्मद आकिब से 315 बोर का तमंचा, शकील अहमद से एक छुरी और सादिक से 315 बोर का तमंचा व कारतूस बरामद किए थे। तब से गिरफ्तार होने पर आरोपी जेल में बंद हैं।
बता दें कि आरोपियों ने जमानत के लिए न्यायालय में याचिका डाली थी। अदालत ने आरोपी सलीम अहमद, सादिक, शकील अहमद, साजिद उर्फ काले और आकिब की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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