मेरठ। लोहियानगर में कूड़ा निस्तारण के करोड़ों रुपये के टेंडर में पांच दिन से नगर निगम उलझा हुआ है। टेंडर प्रक्रिया में लगे अनियमितता के आरोपों के बाद महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने उसको निरस्त कर निगम अफसरों को नई निविदा करने के निर्देश देकर पत्र जारी किया था। महापौर के निर्देश को निगम अफसरों ने नहीं माना और टेंडर की प्रक्रिया को अभी अटकाया है। इसको लेकर शनिवार को निगम परिसर में भाजपा पार्षदों के बीच अलग-अलग चर्चा शुरू हो गईं हैं।
नगर निगम ने लोहियानगर में कूड़ा खत्म करने के लिए टेंडर निकाला था। इसमें चार कंपनी ने भाग लिया। मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव के हस्ताक्षर बिना टेंडर की फाइनेंस ब्रिड भी खोल दी। टेंडर की शर्तों में फेरबदल भी करना बताया गया। अनियमितता होने के आरोप लगने पर महापौर ने टेंडर को निरस्त करने की बात कही है। इस टेंडर को लेकर नगर निगम अफसरों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। महापौर के निर्देश पर विवादों में घिरे टेंडर को निरस्त किया जाए या नहीं। इसको लेकर पांच दिन से निगम अफसरों के बीच मंथन चल रहा है। बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। अगले महीने एनजीटी ने नगर आयुक्त को पेश होकर कूड़ा निस्तारण के प्रबंधन के बारे में निगम की प्रस्तुति देने की तारीख तय कर रखी है।