यूपी के शामली में गैस रिसाव से बीमार हुए 300 बच्चों के मामले में सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार की तहरीर पर शामली शुगर मिल के प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में मंगलवार सुबह सैकड़ों बच्चों की हालत बिगड़ गई। अचानक बच्चों ने गले और सीने में जलन तथा उल्टी आने की शिकायत की और चीख पुकार मच गई। 110 बच्चों को शामली सीएचसी लाकर उपचार कराया गया। काफी बच्चों को अभिभावक अपने साथ ले गए। हादसे के पीछे सर शादीलाल शुगर मिल की डिस्टलरी यूनिट के बायो गैस प्लांट से गैस रिसाव होने की आशंका जताई जा रही है। शासन तक मामला पहुंचने पर जिला प्रशासन हरकत में आ गया। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने बायो गैस प्लांट पर पहुंचकर गैस उत्पादन की एक मशीन पर सील लगा दी और मामले में जांच प्रारंभ कर दी गई है।
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बच्चों को अस्पताल ले जाते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
हादसा मंगलवार सुबह करीब नौ बजे हुआ। शामली के पास के गांव खेड़ीकरमू, लिलौन और बलवा के काफी बच्चे बुढ़ाना रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ते हैं। इन तीनों गांवों का संपर्क मार्ग सर शादीलाल शुगर मिल की डिस्टलरी यूनिट के बायो गैस प्लांट के पास से गुजरता है। वहां से बच्चे पैदल, साइकिल और अन्य वाहनों से आते हैं। इसी संपर्क मार्ग से गुजरने के दौरान बच्चे केमिकल और गैस रिसाव जैसी तीक्ष्ण गंध का शिकार हो गए। स्कूल में पहुंचने पर बच्चों की हालत बिगड़ती चली गई तथा बच्चों को उल्टी लगने लगी। बच्चों ने सीने और गले में जलन की शिकायत की, जिससे स्कूल स्टाफ में भी हड़कंप मच गया। एकाएक बड़ी संख्या में बच्चे यही शिकायत करने लगे, जिसके बाद स्कूल स्टाफ ने बच्चों को स्कूल वाहनों से शामली सीएचसी पहुंचाना शुरु किया। कुछ ही देर में अस्पताल में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती गई, जिससे अस्पताल स्टाफ के भी हाथ पांव फूल गए। सामाजिक लोगों ने भी अस्पताल पहुंचकर बच्चों को उपचार दिलाने में सहयोग किया। सीएचसी से जिन बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ, उन्हें एंबुलेंस और अन्य वाहनों से प्राइवेट अस्पतालों में भिजवाया गया। सूचना पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सांसद हुकुम सिंह, पुलिस अधीक्षक डाक्टर अजयपाल शर्मा, पूर्व विधायक पंकज मलिक सहित अन्य राजनीतिक लोगों ने अस्पताल में पहुंचकर बच्चों का हाल जाना। उधर, मामला शासन तक पहुंचने पर जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक डाक्टर अजयपाल शर्मा, अपर जिलाधिकारी शिव बहादुर सिंह, एसडीएम सुरजीत सिंह और तहसीलदार ने बायोगैस प्लांट पर पहुंचकर निरीक्षण किया। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम को बुलाकर जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने बायो गैस प्लांट में गैस उत्पादन करने वाली एक मशीन पर सील लगा दी। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि बच्चों की हालत बिगड़ने के संबंध में जांच कराई जा रही है। बायोगैस प्लांट से किसी गैस का रिसाव हुआ अथवा कोई और वजह है, उसकी गंभीरता से छानबीन कराई जा रही है। यदि शुगर मिल प्रबंधन की गलती पाई जाती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि प्राथमिक उपचार के दौरान अधिकांश बच्चों की हालत में सुधार हो गया, जिसके चलते बच्चों को अभिभावकों के साथ भेज दिया गया। वहीं, कुछ बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उधर, शुगर मिल प्रबंधन का कहना है कि फैक्ट्री से किसी प्रकार की गैस का रिसाव नहीं हुआ, प्रबंधन हर प्रकार की जांच कराने के लिए तैयार है।
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