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Meerut News: डेढ़ सौ साल पुराने बरगद की छांव में आज भी गूंजता है हर-हर महादेव

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- आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम बना भूनी का प्राकृतिक शिवलिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। सरूरपुर ब्लॉक के गांव भूनी में स्थित प्राकृतिक शिवलिंग वर्षों से ग्रामीण आस्था, लोकविश्वास और प्रकृति के अनोखे संगम का प्रतीक बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार करीब डेढ़ सौ वर्ष से अधिक पुराना यह शिवलिंग दो गांवों की सीमाओं के बीच स्थित है। सावन आते ही यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।
ग्रामीणों की मान्यता है कि यह शिवलिंग करीब 1840 के आसपास जमीन से स्वतः स्फुटित हुआ था। इसके बाद समय के साथ शिवलिंग के समीप बरगद का विशाल पेड़ भी विकसित होता गया। आज इसकी जटाओं और मजबूत तने ने शिवलिंग के चारों ओर प्राकृतिक छतरी बना रखी है, जिससे यह स्थान किसी प्राचीन शिवधाम जैसा नजर आता है।
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पीढ़ियों से चली आ रही आस्था
गांव के बुजुर्ग वीरेंद्र सिंह, ब्रह्मजीत, खुशहाल त्यागी, रामकुमार के अनुसार उनके पूर्वज भी इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते थे। कक्केपुर और भूनी के ग्रामीण इसे भगवान शिव का स्वरूप मानकर जलाभिषेक करते हैं। सावन के महीने में विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर सुबह-शाम जल चढ़ाती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले शिवभक्त कांवड़ लेकर बागपत के पुरा महादेव मंदिर तक जल चढ़ाने जाते थे, लेकिन करीब दो दशक से गांव में स्थित प्राकृतिक शिवलिंग पर ही जलाभिषेक की परंपरा लगातार मजबूत हुई है। अब हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले श्रद्धालु गांव में ही भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
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बरगद भी बना आस्था का हिस्सा
इस शिवलिंग की खासियत केवल इसका प्राकृतिक स्वरूप नहीं, बल्कि इसके साथ खड़ा विशाल बरगद का पेड़ भी है। ग्रामीण इसे शिवलिंग की प्राकृतिक सुरक्षा करने वाला पेड़ मानते हैं। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि पेड़ पर नाग का जोड़ा भी दिखाई देता है, जिसे वह भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यता के रूप में देखते हैं।
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