कम जमीन मिलने से बंगाली परिवार गांव छोड़कर दूसरी जगह बसने को तैयार नहीं, कानपुर देहात में बसाने की है योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। पुनर्वास योजना के तहत मिलने वाली जमीन को लेकर मवाना तहसील के नगला गोसाई गांव में रहने वाले 99 बंगाली हिंदू परिवारों में मायूसी छा गई है। इस बस्ती के अधिकतर परिवारों का दो-दो एकड़ भूमि पर कब्जा है। ऐसे में पुनर्वास योजना के तहत आधा-आधा एकड़ भूमि प्रत्येक परिवार को दिए जाने के सरकार के एलान से वह मायूस हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने लंबे संघर्षों के बाद पुनर्वास के नाम पर यही होगा तो वह गांव छोड़कर दूसरे जगह बसना नहीं चाहेंगे।
पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से आए हिंदू बंगाली समाज के 99 परिवारों को पुनर्वास योजना का लाभ दिए जाने की घोषणा का स्वागत तो किया गया, लेकिन खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। पुनर्वास के स्वरूप को लेकर अब इस गांव के लोगों के चेहरों पर मायूसी नजर आ रही है।
इस गांव के निवासी राम प्रसाद, नवीन राय और रोहित का कहना है कि सरकार से उन्हें कम से कम दो एकड़ भूमि मिलने की उम्मीद थी। इससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण आसानी से कर सकते थे। लेकिन, योजना के तहत आधा एकड़ जमीन दी जा रही है। इतनी जमीन में खेती कर परिवार का गुजारा कर पाना संभव नहीं है।
प्रभावित परिवारों ने योगी आदित्यनाथ सरकार से पुनर्वास योजना पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन के साथ आधारभूत सुविधाएं और पर्याप्त रकबा मिलना जरूरी है, ताकि विस्थापन का दंश झेल चुके परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।
पर्याप्त भूमि नहीं मिलने पर गांव छोड़कर जाने को तैयार नहीं
मेरठ। ग्रामीणों ने सरकार से पुनर्वास योजना पर पुनर्विचार करने और जमीन बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि 62 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मिला यह फैसला अधूरा है। यदि सरकार वास्तव में उन्हें स्थायी समाधान देना चाहती है तो उनकी आजीविका और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।
कोट:
सरकार के फैसले से उम्मीद थी कि हमें दो एकड़ जमीन मिलेगी, लेकिन आधा एकड़ जमीन में गुजारा कैसे होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। -रमेश हरिपद, निवासी नगला गोसाई।
हम सरकार के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन जो जमीन दी जा रही है, वह हमारी जरूरतों के हिसाब से काफी नहीं है। इतने छोटे रकबे में खेती कर परिवार चलाना संभव नहीं है। -सुभाष, निवासी नगला गोसाई।
पुनर्वास योजना के तहत मिली जमीन को हिंदू बंगाली लोगों ने बताया उम्मीद से कम स्रोत संवाद
पुनर्वास योजना के तहत मिली जमीन को हिंदू बंगाली लोगों ने बताया उम्मीद से कम स्रोत संवाद
पुनर्वास योजना के तहत मिली जमीन को हिंदू बंगाली लोगों ने बताया उम्मीद से कम स्रोत संवाद