रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर (मेरठ)। द्वापर युग के साक्षी महाभारत कालीन हस्तिनापुर के कण-कण में प्राचीन इतिहास छिपा है। इसके लिए पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ लंबे समय से रिसर्च कर रहे हैं। इसमें उन्हें अभी तक हड़प्पा कालीन सभ्यता से लेकर द्वापर युग, राजपूत कालीन साक्ष्य भी कई मिल चुके हैं। यहां मौजूद प्राचीन पांडव टीले में दबे प्राचीन महलों की दीवारों को तरास कर संरक्षित करने की प्रक्रिया पुरातत्व विभाग ने एक बार फिर शुरू की है।
ऐतिहासिक नगरी में मौजूद प्राचीन पांडव टीले में कई युगों और सभ्यताओं के साक्ष्य मौजूद हैं। इसे देखते हुए सरकार ने इसे पुरातत्व विभाग के अधीन किया है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण में इसकी सुरक्षा और सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। पांडव टीले में प्राचीन इतिहास को जानने के लिए वर्ष 2022 में उत्खनन कार्य भी कराया गया जहां पर विभिन्न सभ्यताओं से जुड़े प्राचीन अवशेष पुरातत्व विभाग को मिले। इन पर पुरातत्व विभाग की टीम लंबे समय से शोध कर रही है।
अब इस टीले में दबे प्राचीन महलों की दीवारों को तरास कर संरक्षित करने का कार्य फिर शुरू किया गया है। पुरातत्व विभाग इन प्राचीन अवशेषों को संरक्षित कर सकेगा और यहां आने वाले पर्यटक सैलानी इन्हें देखकर अपनी प्राचीन संस्कृति को जान सकेंगे। (संवाद)
पांडव टीले पर मौजूद कई प्राचीन स्थल
उल्टा खेड़ा पांडव टीले को देखने के लिए देश दुनिया से पर्यटक सैलानी आते हैं। यहां प्राचीन महलों के अवशेष महाभारत कालीन कुआं, राजा रघुनाथ का महल, प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर आदि मौजूद हैं।
उत्खनन में मिले कई प्राचीन अवशेष
हस्तिनापुर को महाभारतकालीन माना जाता है। कई बार उजड़े और बसे हस्तिनापुर से कई सभ्यताओं के साक्ष्य मिले हैं। इनमें महाभारत कालीन पीजीडब्ल्यू (चित्रित धूसर मृद भांड) भी शामिल हैं। इसके अलावा उल्टा खेड़ा के अमृत कूप के निकट ट्रेंच लगाकर एएसआई की टीम ने उत्खनन किया था जिसमें सैकड़ों प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए थे।