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खिलाड़ियों की बेकदरी: अफसरों की मनमानी से हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में सड़क पर ठिठुरने को मजबूर हुए 'एथलीट'

Mon, 11 Jan 2021 01:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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स्टेडियम के बाहर बैठे एथलीट - फोटो : amar ujala
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यह खिलाड़ियों की बेकदरी है। प्रदेश के दूरदराज के जिलों से आए प्रतियोगिता में शामिल होने मेरठ आए खिलाड़ी इसे कभी भुला नहीं पाएंगे। प्रतियोगिता शुरू होने से कुछ घंटे पहले तक एथलीट ठहरने और खाने की समस्याओं से लड़ ही नहीं रहे थे, अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदारों पर सवाल भी उठा रहे थे।
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कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सोमवार से दो दिवसीय 54वीं उप्र राज्य वार्षिक एथलेटिक्स चैंपियनशिप शुरू हो रही है। प्रतियोगिता में हर जिले से 20 से 30 खिलाड़ी प्रतिभाग करेंगे। खिलाड़ियों की कुल संख्या 500 से ऊपर पहुंच सकती है। हालांकि जिला एथलेटिक्स संघ के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है। सुबह 10 बजे से 3 बजे तक अलग-अलग स्पर्धाएं होंगी।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड के जिलों से कई खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग लेने और खेल के मैदान में दम-खम दिखाने के लिए एक दिन पहले रविवार सुबह ही यहां आ गए थे। कुछ खिलाड़ी तो चार बजे ही पहुंच गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके ठहरने की व्यवस्था स्टेडियम में ही हो जाएगी। उम्मीद से पहुंचे खिलाड़ी तब अवाक रह गए, जब अधिकारियों की मनमानी के कारण उनके लिए स्टेडयिम का गेट ही बंद कर दिया गया। खिलाड़ी स्टेडियम के बाहर सड़क पर पूरे दिन ठंड में ठिठुरते रहे लेकिन उन्हें स्टेडियम में प्रवेश नहीं दिया गया।
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हाड़ कंपा देने वाली सर्दी के बावजूद स्टेडियम में कोई उनकी बात सुनने वाला भी नहीं था। आयोजकों की अनदेखी और बेरुखी से उन्हें दिन भर परेशानी का सामना करना पड़ा। परेशान महिला खिलाड़ियों के आंखों में आंसू आ गए लेकिन अधिकारी नहीं पसीजे। थक-हार कर शाम को कुछ खिलाड़ी परिचितों और रिश्तेदारों के यहां चले गए तो कुछ ने मिल-जुलकर आसपास के होटल किराए पर लिए। रविवार शाम और देर रात आने वाले 15-20 खिलाड़ी सड़कों पर घूम रहे थे। इनमें से कुछ खिलाड़ियों को सर्किट हाउस की गैलरी में कुछ खिलाड़ियों को आसरा मिल गया।

क्रीड़ा अधिकारी और संघ के सचिव ने पल्ला झाड़ा
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने बताया कि उप्र एथलेटिक संघ के निर्देशों के अनुसार खिलाड़ियों के ठहरने और खाने की व्यवस्था संघ को नहीं करनी थी। जिला संघ सचिव अनु कुमार ने बताया कोविड-19 के कारण खिलाड़ियों को ठहराने की व्यवस्था नहीं की गई। हालांकि पहले भी खिलाड़ी स्टेडियम परिसर में ही ठहरते थे। अलग से कोई इंतजाम नहीं होते थे।

प्रदर्शन प्रभावित होने की आशंका
रविवार को दिन भर भटके और ठहरने के लिए जूझने वाले खिलाड़ियों का शायद इतना बड़ा इम्तिहान अगले दो दिन होने वाली प्रतियोगिता में भी नहीं होगा। आशंका है कि इससे उनका प्रदर्शन भी प्रभावित होगा और कुछ खिलाड़ी बीमार होकर अपने घर जाएंगे। उप्र एथलेटिक्स संघ ने भले ही खिलाड़ियों के ठहरने व खाने की व्यवस्था न की हो लेकिन खिलाड़ियों व जिला संघों के पदाधिकारियों से वार्ता कर ठहरने का इंतजाम तो करा ही सकते थे। इसके लिए खिलाड़ियों से पैसे लिए जा सकते थे।
 
स्टेडियम में हो सकती थी व्यवस्था
बलिया निवासी शशिकांत ने बताया स्टेडियम में ठहरने की व्यवस्था होती तो कमरे के पैसे बच जाते। कुशीनगर निवासी कृष्ण यादव ने बताया उन्हें ठहरने के बारे में जानकारी ही नहीं थी। जानकारी होती तो इंतजाम करके आते। बलिया निवासी चंद्र गुप्ता ने कहा उप्र संघ द्वारा किसी धर्मशाला या अन्य स्थान पर ठहरने की व्यवस्था करा देती तो अच्छा रहता। सीतापुर निवासी अभय यादव ने कहा मेरठ आकर पता चला कि यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
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