महाभारत काल में पांडवों ने भगवान शिव की आराधना कर शिवलिंग की स्थापना की थी
सावन मास की शिवरात्रि पर उमड़ता है शिवभक्तों का सैलाब
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर के उल्टा खेड़ा पांडव टीले के निकट स्थित पांडेश्वर महादेव मंदिर को द्वापर युग का साक्षी माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना कर शिवलिंग की स्थापना की थी। तभी से यह स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र बना है।
प्राकृतिक हरियाली के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर अपने शांत और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से सावन और फाल्गुन माह के प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान भोलेनाथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
मंदिर परिसर में स्थापित शिवलिंग को अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। स्थानीय विपिन, गौरव, मनोज, जेपी बैंसला आदि लोगों के अनुसार सावन और फाल्गुन माह के प्रत्येक सोमवार को यहां सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इन महीनों में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और जल चढ़ाते हैं।
सावन में हजारों कांवड़िये गंगाजल लाकर जलाभिषेक करते हैं। इतिहास और धार्मिक मान्यता का प्रतीक यह प्राचीन मंदिर आज भी अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोग मंदिर के संरक्षण और विकास की मांग भी समय-समय पर उठाते रहे हैं, ताकि इस धरोहर की गरिमा बनी रहे।
प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर स्रोत संवाद
प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर स्रोत संवाद