मेरठ। सोहराबगेट बस अड्डे को तोड़े जाने और नई बिल्डिंग बनने के दौरान बस अड्डा कहां से संचालित होगा, यह प्रशासन अभी तक तय नहीं कर पाया है जबकि पीपीपी मॉडल पर नया बस अड्डा बनाने वाली कंपनी विभाग को लगातार जगह खाली करने के लिए पत्र जारी कर रही है। दो माह पहले जिला प्रशासन और परिवहन निगम के अधिकारियों ने गंगा स्नान के बाद सोहराबगेट बस अड्डे के स्थानांतरण की बात कही थी। बताया जा रहा है कि अभी तक जमीन का चयन ही नहीं हो पाया है।
उप्र सरकार ने सोहराबगेट बस अड्डे को हवाई अड्डे की तर्ज पर बनाने का टेंडर प्राइवेट कंपनी को दिया हुआ है। कंपनी बस अड्डा पीपीपी मॉडल पर तैयार करेगी। भविष्य मेंं एक ही छत के नीचे बस अड्डा, मॉल, होटल आदि की व्यवस्था होगी। आईएसबीटी के स्वरूप में दिखाई देगा। मॉडल बस अड्डा निर्माण शुरू होने से पहले रोडवेज बस अड्डे की पुरानी बिल्डिंग को गिराया जाना है। कंपनी ने परिसर में खड़े पेड़ तो कटवा दिए, लेकिन भूमि खाली न मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके लिए निर्माण कंपनी उप्र परिवहन निगम के अधिकारियों को बस अड्डे की जमीन खाली करने के लिए पत्र लिख चुकी है। अब से पहले कई स्थानों पर सोहराबगेट बस अड्डा संचालन के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जा चुके हैं। अभी तक भी स्थान तय नहीं हुआ है। सोहराबगेट से लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा, बुलंदशहर, हापुड़, राजस्थान आदि स्थानों के लिए 200 बसें चलती हैं।
- जिला प्रशासनिक अधिकारी और परिवहन निगम अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मिलकर अस्थाई सोहराब गेट बस अड्डे के लिए मवाना, लोहियानगर, मेरठ डिपो की जमीन और गढ़ रोड पर ही गांधी आश्रम की खाली पड़ी जमीन का प्रस्ताव तैयार किया था। यह रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को भेजी गई थी। अभी तक इसपर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। प्रयास चल रहा है कि शीघ्र ही भूमि का चयन हो। ताकि बस अड्डे पर काम शुरू हो सके। - संदीप नायक,क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम।